
वैशाख शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाई जाने वाली माता बगलामुखी जयंती का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन भक्त देवी की विधि-विधान से पूजा कर शत्रुओं पर विजय, कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की कामना करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि देवी बगलामुखी को अक्सर एक असुर की जीभ खींचते हुए क्यों दिखाया जाता है? इसके पीछे एक बेहद रोचक और रहस्यमयी कथा जुड़ी है।
कौन हैं माता बगलामुखी?
माता बगलामुखी दस महाविद्याओं में से एक प्रमुख देवी मानी जाती हैं। उन्हें पीतांबरा देवी भी कहा जाता है क्योंकि उनका संबंध पीले रंग से है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी बगलामुखी शत्रुओं की वाणी, बुद्धि और शक्ति को नियंत्रित करने की क्षमता रखती हैं। यही कारण है कि उनकी पूजा विशेष रूप से मुकदमों और विवादों में जीत के लिए की जाती है।
असुर की जीभ पकड़ने की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय धरती पर एक अत्यंत शक्तिशाली असुर का आतंक बढ़ गया था। इस असुर का नाम मदनासुर बताया जाता है। उसने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि उसकी वाणी कभी गलत नहीं होगी और वह जो भी बोलेगा, वह सत्य हो जाएगा। इस वरदान के कारण वह अत्याचारी बन गया और अपनी वाणी से लोगों को नुकसान पहुंचाने लगा।
असुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवता माता बगलामुखी की शरण में पहुंचे। तब देवी प्रकट हुईं और उन्होंने मदनासुर का सामना किया। युद्ध के दौरान देवी ने असुर की जीभ पकड़ ली और उसे निष्क्रिय कर दिया, जिससे उसकी वाणी की शक्ति समाप्त हो गई। इसी कारण देवी को ‘स्तंभन शक्ति’ की देवी कहा जाता है।
क्यों खास है यह स्वरूप?
देवी का यह स्वरूप केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि गहरे आध्यात्मिक अर्थ भी रखता है। यह दर्शाता है कि नकारात्मक सोच, गलत वाणी और दुष्ट शक्तियों को नियंत्रित किया जा सकता है। देवी बगलामुखी का यह रूप हमें यह भी सिखाता है कि शब्दों की शक्ति बहुत बड़ी होती है और उसका सही उपयोग जरूरी है।
पूजा का महत्व और लाभ
माता बगलामुखी की पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी मानी जाती है जो कानूनी मामलों, शत्रु बाधा या करियर में संघर्ष का सामना कर रहे हैं। मान्यता है कि इस दिन पीले वस्त्र पहनकर, पीले फूल अर्पित कर और विशेष मंत्रों का जाप करने से देवी प्रसन्न होती हैं और साधक को विजय का आशीर्वाद देती हैं।
कैसे करें पूजा?
बगलामुखी जयंती के दिन सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद देवी की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाएं और हल्दी, पीले फूल, बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। “ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।
आध्यात्मिक संदेश
देवी बगलामुखी का यह स्वरूप केवल एक कथा नहीं बल्कि जीवन के लिए एक गहरा संदेश है—अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें, नकारात्मकता को रोकें और सत्य के मार्ग पर चलें। यही कारण है कि आज भी लाखों श्रद्धालु इस दिन विशेष पूजा-अर्चना कर देवी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
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