दवा जैसा दम, साइड इफेक्ट एकदम कम! नई स्टडी का दावा- डिप्रेशन और एंग्जायटी को मात देने में एक्सरसाइज है ‘सुपरपावर’

हेल्थ डेस्क: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में डिप्रेशन और एंग्जायटी साइलेंट किलर की तरह पैर पसार रहे हैं। आमतौर पर लोग इनके इलाज के लिए महंगी दवाओं और लंबी चलने वाली काउंसलिंग (थेरेपी) का सहारा लेते हैं। लेकिन हाल ही में हुई एक बड़े स्तर की रिसर्च ने चौंकाने वाले परिणाम दिए हैं। स्टडी के मुताबिक, नियमित एक्सरसाइज मानसिक रोगों के लक्षणों को कम करने में उतनी ही असरदार है जितनी कि एंटीडिप्रेसेंट दवाएं, और कई मामलों में तो यह उनसे भी बेहतर साबित हुई है।

80,000 लोगों पर हुई रिसर्च: क्या कहते हैं आंकड़े?

यह कोई सामान्य स्टडी नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों ने एक ‘मेटा-मेटा-एनालिसिस’ किया है। इसमें 1,000 से ज्यादा ट्रायल्स और लगभग 80,000 लोगों के डेटा का गहराई से अध्ययन किया गया। रिसर्च का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि क्या सिर्फ शारीरिक गतिविधि से मन की बीमारियों को ठीक किया जा सकता है। नतीजों ने साफ कर दिया कि एक्सरसाइज न केवल शरीर को फिट रखती है, बल्कि दिमाग में ‘फील गुड’ हार्मोन रिलीज करके उदासी और घबराहट को जड़ से खत्म करने की ताकत रखती है।

किन एक्सरसाइज ने दिखाया सबसे ज्यादा असर?

स्टडी में अलग-अलग तरह की वर्कआउट स्टाइल पर शोध किया गया, जिसमें से कुछ के परिणाम बेहद शानदार रहे:

  • एरोबिक एक्टिविटी (सबसे प्रभावी): चलना, दौड़ना, साइक्लिंग और तैराकी डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में सबसे ऊपर रही।

  • माइंड-बॉडी एक्सरसाइज: योग और ध्यान (मेडिटेशन) ने एंग्जायटी यानी घबराहट को शांत करने में बड़ी भूमिका निभाई।

  • रेजिस्टेंस ट्रेनिंग: वेट लिफ्टिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से भी मरीजों के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी और मानसिक तनाव में कमी देखी गई।

युवाओं और नई माताओं के लिए ‘संजीवनी’

रिसर्च में पाया गया कि दो वर्गों को एक्सरसाइज से सबसे ज्यादा फायदा हुआ। पहले हैं 18 से 30 साल के युवा, जो करियर और लाइफस्टाइल के चलते तनाव में रहते हैं। दूसरी हैं हाल ही में मां बनीं महिलाएं (Postpartum), जिनके लिए एक्सरसाइज मानसिक सेहत सुधारने का सबसे सुलभ और सुरक्षित जरिया साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन महिलाओं के लिए घर के पास ही एक्सरसाइज की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो पोस्टपार्टम डिप्रेशन के मामलों को काफी कम किया जा सकता है।

कैसे और कितनी देर करें?

जरूरी नहीं कि आप घंटों जिम में पसीना बहाएं। स्टडी के मुताबिक:

  1. निरंतरता जरूरी है: हफ्ते में सिर्फ 1-2 बार की गई प्रोफेशनल देखरेख में एक्सरसाइज भी असर दिखाती है।

  2. एंग्जायटी के लिए हल्की चाल: घबराहट दूर करने के लिए 8 हफ्तों तक लगातार धीमी चाल से चलना (Walking) बेहद प्रभावी रहा।

  3. ग्रुप वर्कआउट: अकेले के बजाय ग्रुप में एक्सरसाइज करना डिप्रेशन के मरीजों के लिए ज्यादा फायदेमंद पाया गया क्योंकि इससे सामाजिक जुड़ाव बढ़ता है।

नोट: हालांकि एक्सरसाइज एक शक्तिशाली टूल है, लेकिन गंभीर मामलों में दवा और थेरेपी का अपना महत्व है। अपने ट्रीटमेंट प्लान में बदलाव करने से पहले हमेशा डॉक्टर या मनोचिकित्सक की सलाह जरूर लें।

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