कानपुर लैंबोर्गिनी केस: ‘शिकायतकर्ता नहीं चाहता कार्रवाई’, रसूखदार पिता बोले- घर में कोई नहीं पीता शराब, शिवम का दिल्ली में इलाज जारी

कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में हुए चर्चित लैंबोर्गिनी हादसे ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। शहर के दिग्गज तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा से जुड़े इस मामले में बचाव पक्ष ने अपनी दलीलें पेश करनी शुरू कर दी हैं। जहां एक ओर विपक्ष इसे रसूख के दम पर केस दबाने की कोशिश बता रहा है, वहीं आरोपी के वकील का दावा है कि पीड़ित पक्ष अब कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहता।

वकील का बड़ा दावा: ‘तौफीक को नहीं चाहिए कोई एक्शन’

मंगलवार को आरोपी शिवम मिश्रा के वकील धर्मेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत में चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा, “हमने चालक मोहन की ओर से कोर्ट में याचिका दायर की है। सबसे अहम बात यह है कि मुख्य शिकायतकर्ता तौफीक ने अब स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं चाहता।” वकील ने आगे कहा कि पुलिस रिपोर्ट मिलते ही जमानत की प्रक्रिया तेज की जाएगी। उनका तर्क है कि हादसे के वक्त मोहन गाड़ी चला रहा था, शिवम नहीं।

पिता केके मिश्रा की सफाई: ‘ड्राइवर दे रहा था शिवम को सहारा’

बेटे पर लगे आरोपों के बीच तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा भी बचाव में उतरे हैं। उन्होंने घटनाक्रम को ‘तकनीकी खराबी’ और ‘खराब सेहत’ का नाम दिया है। मिश्रा के मुताबिक, “हादसे से एक दिन पहले कार में कुछ खराबी आई थी, जिसे चेक करने के लिए शिवम और ड्राइवर टेस्ट ड्राइव पर निकले थे। ड्राइव के दौरान अचानक शिवम की तबीयत बिगड़ी और उसे नींद आने लगी। ड्राइवर उसे सहारा दे रहा था, तभी सामने टेंपो आने से हादसा हो गया।”

शराब के सेवन से इनकार, दिल्ली में चल रहा है उपचार

सोशल मीडिया पर शिवम के नशे में होने के दावों को खारिज करते हुए पिता ने कहा, “हमारे परिवार में कोई भी शराब का सेवन नहीं करता। शिवम हादसे के बाद बेहोश हो गया था, जिसे बॉडीगार्ड्स ने शीशा तोड़कर निकाला। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों की सलाह पर उसे दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज चल रहा है।”

सियासी उबाल: अखिलेश बोले- ‘पैसा चलेगा तो न्याय कहां मिलेगा?’

इस मामले पर उत्तर प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “जब पैसा और रसूख चलेगा, तो न्याय की उम्मीद कयामत तक नहीं की जा सकती। इसमें पीड़ितों को इंसाफ मिलना मुश्किल लग रहा है।” वहीं, डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि घटना की घोर निंदा की जाती है और सरकार सुनिश्चित करेगी कि दोषी, चाहे वह कोई भी हो, बच न पाए।

पुलिस कमिश्नर का सख्त रुख: ड्राइविंग लाइसेंस की भी होगी जांच

कानपुर पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने स्पष्ट किया है कि पूरी जांच मेडिकल रिपोर्ट और तथ्यों पर आधारित होगी। उन्होंने कहा, “अगर यह पाया गया कि शिवम मेडिकल रूप से गाड़ी चलाने के लिए फिट नहीं था, तो हम यह भी जांचेंगे कि उसे ड्राइविंग लाइसेंस कैसे जारी हुआ। इसमें आरटीओ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।”

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