बेरूत: अमेरिका की मध्यस्थता में इजरायल और लेबनान सरकार के बीच हुए नए समझौते पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लेबनान के प्रभावशाली सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह ने इस समझौते को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे देश की संप्रभुता के खिलाफ बताया है। संगठन के प्रमुख नईम कासिम ने साफ शब्दों में कहा कि यह समझौता लेबनान के हितों की रक्षा करने के बजाय इजरायल के पक्ष में झुका हुआ है और हिजबुल्लाह इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगा। इस बयान के बाद क्षेत्र में स्थायी शांति की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
समझौते पर हिजबुल्लाह का तीखा विरोध
हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने शनिवार को जारी अपने बयान में अमेरिका, इजरायल और लेबनान के बीच बने फ्रेमवर्क समझौते की कड़ी आलोचना की। उनका कहना है कि लेबनान सरकार ने राष्ट्रीय हितों से समझौता करते हुए एकतरफा रियायतें दी हैं। कासिम के मुताबिक, यह समझौता लेबनान की संप्रभुता को कमजोर करता है और इसलिए इसे मान्यता नहीं दी जा सकती।
उन्होंने कहा कि सरकार ने जिस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए हैं, वह देश के लिए सम्मानजनक नहीं बल्कि अपमानजनक है। हिजबुल्लाह इस समझौते को पूरी तरह अस्वीकार करता है।
‘हथियार छोड़ने का सवाल ही नहीं’
नईम कासिम ने स्पष्ट किया कि हिजबुल्लाह अपने हथियार छोड़ने की किसी भी शर्त को स्वीकार नहीं करेगा। उनका कहना है कि समझौते में शामिल निशस्त्रीकरण की शर्तें संगठन के लिए अस्वीकार्य हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस समझौते के जरिए लेबनान सरकार ने इजरायल को अनावश्यक लाभ पहुंचाया है। कासिम के अनुसार, इससे देश की संप्रभुता कमजोर होगी और इजरायल के कब्जे वाले इलाकों की स्थिति और जटिल हो सकती है।
‘बिना शर्त पीछे हटे इजरायल’
हिजबुल्लाह प्रमुख ने कहा कि इजरायल को लेबनान की जमीन से बिना किसी शर्त के तत्काल पीछे हटना चाहिए। उनका आरोप है कि इजरायली सेना अवैध रूप से लेबनानी क्षेत्र में मौजूद है और सरकार का मौजूदा रुख इस कब्जे को लंबे समय तक जारी रखने का रास्ता खोल सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसी स्थिति बनी रही तो भविष्य में इन इलाकों के स्थायी विलय का खतरा भी पैदा हो सकता है।
ईरान-अमेरिका एमओयू लागू करने की मांग
नईम कासिम ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उसी ढांचे के तहत लेबनान में युद्धविराम सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, वर्तमान फ्रेमवर्क समझौता उस दिशा में प्रभावी कदम नहीं है और इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए।
क्या है नया इजरायल-लेबनान समझौता?
वॉशिंगटन में हुए इस फ्रेमवर्क समझौते में इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्रों से वापसी और हिजबुल्लाह के निशस्त्रीकरण जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है। लेबनान सरकार ने इसे क्षेत्र में स्थिरता की दिशा में अहम कदम बताया है, लेकिन हिजबुल्लाह के विरोध के बाद इसके भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
हवाई हमलों और संघर्ष से बिगड़े हालात
ईरान पर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद लेबनान भी इस क्षेत्रीय तनाव का हिस्सा बन गया। इसके बाद हिजबुल्लाह ने इजरायल की ओर रॉकेट दागे, जबकि जवाबी कार्रवाई में इजरायली सेना ने लेबनान के कई इलाकों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं। इजरायली सेना अब भी लेबनान के कुछ हिस्सों में मौजूद है, जिससे हालात सामान्य होने की संभावना कमजोर पड़ती दिख रही है।
शांति प्रक्रिया पर बढ़ी अनिश्चितता
विशेषज्ञों का मानना है कि हिजबुल्लाह द्वारा समझौते को नकारे जाने से लेबनान में स्थायी युद्धविराम और शांति स्थापित करने की प्रक्रिया मुश्किल हो सकती है। यदि सभी पक्ष किसी साझा समाधान पर सहमत नहीं होते, तो सीमा पर तनाव और संघर्ष का खतरा बना रह सकता है।
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