India Pakistan: ‘गाजी’ के बाद अब चीनी ‘हंगोर’ के सहारे बंगाल की खाड़ी में उतरने की तैयारी! क्या भारत के लिए बढ़ रही नई समुद्री चुनौती?

इस्लामाबाद। पाकिस्तान एक बार फिर बंगाल की खाड़ी में अपनी समुद्री मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी करता दिखाई दे रहा है। करीब पांच दशक पहले 1971 के युद्ध में अमेरिकी पनडुब्बी पीएनएस गाजी के डूबने के बाद पाकिस्तान ने इस रणनीतिक समुद्री क्षेत्र से दूरी बना ली थी। अब चीन से मिली अत्याधुनिक पीएनएस हंगोर पनडुब्बी के दम पर वह एक बार फिर पूर्वी समुद्री मोर्चे पर सक्रिय होने की योजना बना रहा है। माना जा रहा है कि इस कदम से हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में भारत-पाकिस्तान के बीच सामरिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

चीन की तकनीक से लैस है नई हंगोर क्लास पनडुब्बी

हाल ही में पाकिस्तान नौसेना में शामिल हुई पीएनएस हंगोर चीन की Type-039B Yuan Class डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बी का निर्यात संस्करण है। यह अत्याधुनिक Air Independent Propulsion (AIP) तकनीक से लैस है, जिसके कारण यह लंबे समय तक पानी के भीतर बिना सतह पर आए संचालन करने में सक्षम मानी जाती है। इसके साथ ही इसकी स्टील्थ क्षमता भी इसे पारंपरिक पनडुब्बियों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण बनाती है।

11 जून को यह पनडुब्बी कराची बंदरगाह पहुंची थी और इसे पाकिस्तान की समुद्री ताकत में बड़ा इजाफा माना जा रहा है।

पाकिस्तान को मिलेंगी कुल आठ हंगोर क्लास पनडुब्बियां

पाकिस्तान और चीन के बीच हुए रक्षा समझौते के तहत पाकिस्तान को कुल आठ हंगोर क्लास पनडुब्बियां मिलनी हैं। इनमें से चार पनडुब्बियों का निर्माण चीन में किया जा रहा है, जबकि शेष चार पाकिस्तान में तैयार की जाएंगी। इन पनडुब्बियों को लंबी दूरी की समुद्री गश्त, निगरानी, खुफिया मिशन और जरूरत पड़ने पर हमलावर अभियानों के लिए डिजाइन किया गया है।

क्या बंगाल की खाड़ी में बढ़ेगी पाकिस्तान की सक्रियता?

रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान भविष्य में इन पनडुब्बियों के जरिए बंगाल की खाड़ी में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर सकता है। यह इलाका भारत की समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों के लिहाज से बेहद रणनीतिक माना जाता है। ऐसे में पाकिस्तान की किसी भी नई तैनाती पर भारतीय नौसेना की नजर रहना तय माना जा रहा है।

1971 की हार अब भी पाकिस्तान को याद होगी

बंगाल की खाड़ी का जिक्र आते ही 1971 का युद्ध याद आता है, जब पाकिस्तान ने अमेरिकी मूल की पीएनएस गाजी पनडुब्बी को भारतीय विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को निशाना बनाने के मिशन पर भेजा था। हालांकि विशाखापत्तनम तट के पास भारतीय नौसेना की कार्रवाई के दौरान पीएनएस गाजी समुद्र में डूब गई थी। इसके बाद पाकिस्तान ने लंबे समय तक बंगाल की खाड़ी में पनडुब्बी भेजने से परहेज किया।

भारत के लिए क्या है रणनीतिक महत्व?

हालांकि पाकिस्तान की नई पनडुब्बियों को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं, लेकिन समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संभावित चुनौती का आकलन केवल तकनीकी दावों के आधार पर नहीं किया जा सकता। भारतीय नौसेना लगातार अपनी पनडुब्बी रोधी क्षमताओं, समुद्री निगरानी और पूर्वी नौसैनिक कमान को मजबूत करने पर काम कर रही है। ऐसे में यदि पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में अपनी गतिविधियां बढ़ाता है, तो क्षेत्र में सामरिक सतर्कता और भी बढ़ सकती है।

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