हूती विद्रोहियों का सऊदी जहाज पर मिसाइल हमला, 4 क्रू मेंबरों की मौत; रेड सी में 8 जहाज निशाने पर, बढ़ा समुद्री संकट

यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में सऊदी अरब से जुड़े एक मालवाहक जहाज को मिसाइल से निशाना बनाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में जहाज के चार क्रू मेंबरों की मौत हो गई। मृतकों में तीन पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक शामिल है। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब रेड सी यानी लाल सागर में हूती हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति पहले ही दबाव में है।

तंजानिया के झंडे वाला था ‘तिहामा’ जहाज

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हूती हमले का शिकार हुआ जहाज ‘तिहामा’ तंजानिया के झंडे के तहत चल रहा था और सऊदी अरब से जुड़ा बताया जा रहा है। यह जहाज ओमान के सलालाह पोर्ट से जिबूती की ओर जा रहा था। बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में पहुंचने के दौरान हूती विद्रोहियों ने इस पर मिसाइल हमला किया।

हूती विद्रोहियों ने 20 जुलाई से सऊदी अरब से जुड़े जहाजों की नाकाबंदी शुरू करने की बात कही थी। इसके बाद से रेड सी में सऊदी से जुड़े कम से कम आठ जहाजों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई है। इनमें एनसिलिया, लायला, गजल और वफा जैसे जहाज शामिल हैं।

सऊदी तेल टैंकरों में लगी थी आग

22 जुलाई की रात भी हूती विद्रोहियों ने सऊदी तेल टैंकरों इनसेलिया और लायला पर हमला किया था। हमले के बाद दोनों जहाजों में आग लगने की खबर सामने आई थी। लगातार हो रहे हमलों ने रेड सी के इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी से जुड़े जहाजों पर हूतियों के हमलों में यह पहली घटना है, जिसमें किसी व्यक्ति की मौत की जानकारी सामने आई है।

होर्मुज के बाद बाब अल-मंदेब में भी बढ़ा खतरा

रेड सी में बढ़ते हमले ऐसे समय हो रहे हैं, जब होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक समुद्री कारोबार पहले ही दबाव में है। अब बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाए जाने से शिपिंग कंपनियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

हूती विद्रोही रेड सी से गुजरने वाले जहाजों को लगातार निशाना बना रहे हैं। सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण कई शिपिंग कंपनियां इस समुद्री मार्ग से दूरी बना रही हैं। इसका सीधा असर सऊदी अरब के तेल निर्यात और क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही पर पड़ रहा है।

बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों की संख्या घटी

केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से रोजाना औसतन 32 जहाज गुजरे। सामान्य स्थिति में यहां प्रतिदिन करीब 50 जहाजों की आवाजाही होती थी। यानी अब इस समुद्री रास्ते से रोजाना करीब 18 कम जहाज गुजर रहे हैं।

सुरक्षा जोखिम से बचने के लिए कई जहाज अब अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से के चारों ओर से लंबा समुद्री रास्ता अपना रहे हैं। इस रूट की दूरी काफी ज्यादा है। ऐसे में सामान को मंजिल तक पहुंचने में अधिक समय लग रहा है और परिवहन लागत भी बढ़ सकती है।

लंबे समुद्री मार्ग का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है। सामान की उपलब्धता प्रभावित होने और सप्लाई लाइन पर दबाव बढ़ने की स्थिति में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

यमन में ईरान और सऊदी अरब आमने-सामने

यमन लंबे समय से ईरान और सऊदी अरब के बीच क्षेत्रीय संघर्ष का अहम केंद्र रहा है। दोनों देश यमन में अलग-अलग पक्षों का समर्थन करते हैं। सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में है, जबकि ईरान हूती विद्रोहियों का समर्थन करता है। हूती संगठन यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है।

हूती विद्रोहियों ने 2023 और 2024 में भी रेड सी से गुजरने वाले जहाजों को लगातार निशाना बनाया था। इन हमलों के कारण समुद्री यातायात प्रभावित हुआ और कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को अपने रास्ते बदलने पड़े थे।

मौजूदा हालात में हूती हमलों का असर इसलिए ज्यादा गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि दुनिया पहले से ही होर्मुज स्ट्रेट में बने तनाव और उसके कारण पैदा हुए समुद्री संकट से जूझ रही है।

दुनिया के लिए रेड सी इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

रेड सी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। इसके एक ओर सऊदी अरब और यमन हैं, जबकि दूसरी ओर मिस्र, सूडान, इरिट्रिया, जिबूती और सोमालिया स्थित हैं। यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच समुद्री व्यापार के लिए यह मार्ग बेहद अहम है।

रेड सी से आने-जाने के प्रमुख रास्तों में पूर्वी छोर पर बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और उत्तरी छोर पर स्वेज नहर शामिल हैं। इसलिए इन रास्तों में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कंटेनर शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।

बाब अल-मंदेब अपने सबसे संकरे हिस्से में करीब 29 किलोमीटर चौड़ा है। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण यहां जहाजों की आवाजाही के लिए समुद्री मार्ग सीमित हैं। ऐसे में किसी सुरक्षा संकट के कारण जहाजों को वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़े तो यात्रा की दूरी और लागत दोनों बढ़ जाती हैं।

ईरान के साथ संघर्ष के बाद होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी के कारण सऊदी अरब अपने तेल निर्यात के लिए समुद्री रास्तों पर अतिरिक्त दबाव महसूस कर रहा है। अब इसी बीच ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की मौजूदगी और हमलों ने रेड सी क्षेत्र की सुरक्षा को भी गंभीर चुनौती बना दिया है।

सामान्य परिस्थितियों में दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट से गुजरती है। होर्मुज स्ट्रेट और रेड सी, दोनों क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर दबाव बढ़ने की चिंता है।

कारोबारी जहाजों से शुल्क वसूलने की तैयारी में हूती

इस बीच यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से रेड सी के दक्षिणी हिस्से से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों पर शुल्क लगाने की तैयारी की खबर भी सामने आई है। रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस प्रस्ताव को लेकर चर्चा हुई है, हालांकि इसे लागू करने की कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए हूती नेता ईरान गए थे। इसी दौरान ईरानी अधिकारियों की ओर से कारोबारी जहाजों पर टैक्स लगाने का विचार सामने रखा गया।

इसके बाद ईरानी सलाहकारों ने हूती अधिकारियों के साथ मिलकर संभावित शुल्क वसूली व्यवस्था तैयार करने में मदद की। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत चीनी जहाजों को इस शुल्क से छूट दिए जाने की संभावना बताई गई है। चीन सऊदी अरब से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देशों में शामिल है।

रेड सी में लगातार बढ़ते हमले, जहाजों की घटती आवाजाही और संभावित शुल्क वसूली की योजना ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। अगर तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक शिपिंग, तेल आपूर्ति, सप्लाई चेन और सामान की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

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