Iran War Impact: ईरान युद्ध के बीच 6 बड़ी तेल कंपनियों ने कमाए 81 अरब डॉलर, कच्चे तेल की कीमतों में 23% उछाल से दुनिया पर महंगाई का दबाव

तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी: ईरान से जुड़े युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच दुनिया की छह सबसे बड़ी तेल कंपनियों ने अप्रैल से जून तिमाही के दौरान संयुक्त रूप से करीब 81 अरब डॉलर का मुनाफा दर्ज किया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में तेल की बढ़ती कीमतों ने इन कंपनियों की कमाई को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।

कच्चे तेल की कीमतों में 23% की तेजी

ईरान से जुड़े सैन्य तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 23 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। तेल की कीमतों में आई इस तेजी का असर केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवहन, उत्पादन और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत भी बढ़ी। इसके चलते कई देशों में महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिला।

81 अरब डॉलर का मुनाफा, कई देशों के बजट से भी अधिक

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की छह प्रमुख तेल कंपनियों ने केवल तीन महीनों में कुल 81 अरब डॉलर का लाभ अर्जित किया। यह राशि कई देशों के वार्षिक रक्षा बजट से भी अधिक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता ने तेल कंपनियों के मुनाफे में अहम भूमिका निभाई।

वैश्विक बाजार पर युद्ध का व्यापक असर

ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि युद्ध और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण निवेशकों में आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई, जिससे कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर गईं। इसका असर वैश्विक शेयर बाजार, परिवहन लागत और औद्योगिक उत्पादन पर भी पड़ा।

महंगाई बढ़ने से आम लोगों पर असर

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर पेट्रोल, डीजल, गैस और माल ढुलाई की लागत पर पड़ता है। जब परिवहन महंगा होता है तो खाद्य पदार्थों सहित कई जरूरी वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। यही वजह है कि तेल बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रभाव दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं और आम उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।

विशेषज्ञों की नजर आगे की स्थिति पर

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, आने वाले समय में प्रमुख तेल उत्पादक देशों की उत्पादन नीति और वैश्विक मांग भी कीमतों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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