
तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी परमाणु विवाद को लेकर बड़ी प्रगति की खबर सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, तेहरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की शर्त पर अमेरिका के साथ एक नए समझौते के लिए तैयार हो सकता है। इसके बदले ईरान पर लगे कुछ प्रमुख आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दिए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे देश को करीब 25 अरब डॉलर तक का आर्थिक फायदा मिल सकता है।
समझौते के फाइनल ड्राफ्ट में कई अहम बिंदु शामिल
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी को बताया कि अमेरिका के साथ संभावित समझौते के लिए तैयार किए गए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) के अंतिम मसौदे में कई महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया है। अधिकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और कुछ प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं।
परमाणु हथियार नहीं बनाने की शर्त पर राहत
रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान इस बात की प्रतिबद्धता दिखा सकता है कि वह परमाणु हथियार निर्माण की दिशा में आगे नहीं बढ़ेगा। इसके बदले अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा लगाए गए कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी जा सकती है। माना जा रहा है कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी, जो वर्षों से प्रतिबंधों के दबाव का सामना कर रही है।
तेल कारोबार पर लगे प्रतिबंधों में भी मिल सकती है ढील
समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू ईरान के तेल निर्यात से जुड़ा माना जा रहा है। यदि वार्ता सफल रहती है तो ईरानी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों को हटाया जा सकता है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी असर देखने को मिल सकता है और ईरान की विदेशी मुद्रा आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
25 अरब डॉलर की आर्थिक राहत की संभावना
सूत्रों का दावा है कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ईरान को करीब 25 अरब डॉलर तक की आर्थिक राहत मिल सकती है। यह राहत निवेश, प्रतिबंधों में छूट और वित्तीय लेनदेन पर लगी सीमाओं को कम करने जैसे उपायों के माध्यम से दी जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईरान की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उसकी भागीदारी बढ़ सकती है।
वैश्विक राजनीति पर भी रहेगा असर
ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौता केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर मध्य पूर्व की राजनीति, वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि दोनों पक्ष अंतिम सहमति तक कब पहुंचते हैं और समझौते की औपचारिक घोषणा कब होती है।
Hindustan Awaaz – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया