Iran-US Deal: अमेरिका से समझौते के बाद ईरान की कूटनीतिक सक्रियता तेज, तुर्की, इराक और मिस्र को किया फोन; ट्रंप के सामने रखी यह बड़ी शर्त

Iran-US Relations: अमेरिका के साथ शांति समझौते को लेकर आगे बढ़ रही बातचीत के बीच ईरान ने अपनी कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। तेहरान ने तुर्की, इराक और मिस्र के विदेश मंत्रियों से संपर्क साधते हुए क्षेत्रीय हालात और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर चर्चा की। इस दौरान ईरान ने अमेरिकी नेतृत्व के सामने रखी गई अपनी प्रमुख शर्तों की भी जानकारी साझा की।

क्षेत्रीय देशों से ईरान की अहम बातचीत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने तुर्की, इराक और मिस्र के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग बातचीत की। ईरानी विदेश मंत्रालय से जुड़े आधिकारिक संचार माध्यमों के अनुसार, इन वार्ताओं में मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति, लेबनान में जारी सैन्य गतिविधियां और संभावित शांति प्रक्रिया प्रमुख मुद्दे रहे।बताया गया कि ईरान ने क्षेत्रीय देशों को अपने रुख से अवगत कराते हुए कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों को जिम्मेदारी निभानी होगी।

लेबनान पर हमलों को रोकने की मांग

बातचीत के दौरान ईरान ने स्पष्ट रूप से कहा कि लेबनान पर जारी इजरायली सैन्य हमलों को तत्काल रोका जाना चाहिए। तेहरान का मानना है कि मौजूदा हालात क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं और यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो तनाव और बढ़ सकता है।ईरान ने यह भी दोहराया कि संघर्ष समाप्त करने के लिए तैयार किए गए फ्रेमवर्क समझौते को प्रभावी ढंग से लागू करना आवश्यक है।

अमेरिका की भूमिका पर ईरान का जोर

ईरानी विदेश मंत्री ने बातचीत में कहा कि युद्धविराम और शांति प्रक्रिया को जमीन पर लागू कराने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अमेरिका पर है। तेहरान का मानना है कि यदि वाशिंगटन अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन करता है तो क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति संभव है।सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी पक्ष के सामने भी यही शर्त रखी है कि किसी भी समझौते का वास्तविक परिणाम तभी माना जाएगा जब क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई पर प्रभावी रोक लगे और सभी पक्ष तय ढांचे का पालन करें।

मध्य पूर्व की राजनीति पर नजर

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते कूटनीतिक संपर्कों के बीच तुर्की, इराक और मिस्र जैसे प्रभावशाली क्षेत्रीय देशों से ईरान की बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन संपर्कों का असर मध्य पूर्व की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति पर देखने को मिल सकता है।फिलहाल इस मामले में और अधिक आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। जैसे-जैसे नए अपडेट सामने आएंगे, स्थिति और स्पष्ट होगी।

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