Five Eyes Alliance से बाहर रहकर भी भारत की बड़ी चाल, 5 में से 3 देशों से डील तय, अब अमेरिका-कनाडा पर नजर

नई दिल्ली: वैश्विक रणनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और इसी बीच भारत ने एक ऐसी कूटनीतिक चाल चली है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर हलचल बढ़ा दी है। खुफिया साझेदारी के लिए मशहूर Five Eyes Alliance का हिस्सा न होते हुए भी भारत ने इस समूह के पांच में से तीन देशों के साथ अहम समझौते कर लिए हैं। अब अमेरिका और कनाडा के साथ भी बातचीत जारी है, जिससे संकेत मिलते हैं कि भारत बिना औपचारिक सदस्य बने ही इस गठबंधन के करीब पहुंच रहा है।

क्या है Five Eyes Alliance और क्यों है खास
Five Eyes Alliance दुनिया के सबसे शक्तिशाली खुफिया गठबंधनों में गिना जाता है। इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा शामिल हैं। यह समूह आपस में संवेदनशील खुफिया जानकारी साझा करता है, खासकर साइबर सुरक्षा, आतंकवाद और वैश्विक खतरों को लेकर। भारत इस गठबंधन का सदस्य नहीं है, लेकिन हाल के घटनाक्रम बताते हैं कि नई दिल्ली इस नेटवर्क के साथ अपनी पहुंच मजबूत करने में जुटी है।

तीन देशों से समझौते, रणनीतिक बढ़त की ओर भारत
सूत्रों के मुताबिक भारत ने इस गठबंधन के तीन देशों—अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में से दो-तीन के साथ पहले ही महत्वपूर्ण सुरक्षा और खुफिया सहयोग समझौते कर लिए हैं। इन समझौतों के जरिए भारत को आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा सहयोग और खुफिया सूचनाओं तक बेहतर पहुंच मिल रही है। यह कदम चीन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।

अमेरिका और कनाडा से बातचीत जारी
भारत अब अमेरिका और कनाडा के साथ भी अपने संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। खासकर अमेरिका के साथ पहले से मौजूद रणनीतिक साझेदारी को और विस्तार देने पर जोर है। कनाडा के साथ हाल के समय में कुछ कूटनीतिक तनाव जरूर देखने को मिले हैं, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच संवाद जारी है। यदि ये वार्ताएं सफल होती हैं, तो भारत को Five Eyes नेटवर्क के करीब पहुंचने में बड़ी सफलता मिल सकती है।

बिना सदस्य बने कैसे मिल रहा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति पर काम कर रहा है। यानी वह किसी एक समूह में पूरी तरह शामिल हुए बिना कई देशों के साथ अलग-अलग स्तर पर सहयोग बढ़ा रहा है। इससे भारत को स्वतंत्रता भी मिलती है और रणनीतिक फायदे भी। Five Eyes के देशों के साथ द्विपक्षीय समझौते इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।

चीन फैक्टर और इंडो-पैसिफिक रणनीति
भारत के इन कदमों के पीछे सबसे बड़ा कारण चीन की बढ़ती आक्रामकता को माना जा रहा है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के लिए भारत, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है। ऐसे में खुफिया साझेदारी और तकनीकी सहयोग भारत की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन गए हैं।

क्या भविष्य में सदस्य बन सकता है भारत?
फिलहाल भारत के Five Eyes Alliance का औपचारिक सदस्य बनने की कोई संभावना स्पष्ट नहीं है। हालांकि, जिस तरह से भारत इस समूह के देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है, उससे यह जरूर कहा जा सकता है कि वह इस नेटवर्क के प्रभाव क्षेत्र में अपनी जगह बना रहा है। आने वाले समय में यह सहयोग और गहरा हो सकता है।

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