भौम प्रदोष व्रत 2026: मंगलवार को आने वाला यह पावन व्रत कब है? जानें तारीख, प्रदोष काल और पूजा विधि, मिलेगा विशेष लाभ

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। जब यह व्रत मंगलवार के दिन पड़ता है तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह व्रत भगवान शिव और मंगल ग्रह (भौम) से जुड़ा होने के कारण अत्यंत फलदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में भौम प्रदोष व्रत की तिथि को लेकर भक्तों में खास उत्सुकता बनी हुई है।


क्या होता है भौम प्रदोष व्रत?

भौम प्रदोष व्रत हर माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, लेकिन जब यह मंगलवार को पड़ता है तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ हनुमान जी और मंगल देव की पूजा का भी विशेष फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस व्रत से कर्ज, रोग और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है।


2026 में भौम प्रदोष व्रत की संभावित तिथि

पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में आने वाले कुछ त्रयोदशी तिथियां मंगलवार को पड़ने पर भौम प्रदोष व्रत का संयोग बनाएंगी। सटीक तिथि अलग-अलग मासिक पंचांग के अनुसार निर्धारित होगी। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय पंचांग या ज्योतिषीय गणना के आधार पर सही तिथि का निर्धारण करें।


प्रदोष काल का समय क्या होता है?

प्रदोष व्रत में पूजा का सबसे शुभ समय प्रदोष काल माना जाता है। यह सूर्यास्त के बाद लगभग 1.5 घंटे तक रहता है। इस अवधि में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।


भौम प्रदोष व्रत की पूजा विधि

इस दिन व्रती प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं। शाम के समय प्रदोष काल में भगवान शिव का अभिषेक दूध, जल, शहद और बेलपत्र से किया जाता है। इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप और शिव चालीसा का पाठ किया जाता है। कई भक्त हनुमान जी की भी पूजा करते हैं और मंगलवार व्रत कथा का श्रवण करते हैं।


भौम प्रदोष व्रत के लाभ

मान्यता है कि इस व्रत को करने से कर्ज से मुक्ति, आर्थिक उन्नति, स्वास्थ्य लाभ और मानसिक शांति प्राप्त होती है। विशेष रूप से मंगल दोष और ग्रह बाधाओं के निवारण में यह व्रत अत्यंत प्रभावी माना जाता है।


निष्कर्ष

भौम प्रदोष व्रत 2026 में भी भक्तों के लिए आस्था और श्रद्धा का महत्वपूर्ण अवसर लेकर आएगा। सही तिथि और विधि के अनुसार व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की मान्यता है।

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