
भारतीय सिनेमा और रंगमंच की दिग्गज अदाकारा जोहरा सहगल को ‘लाडली ऑफ द सेंचुरी’ के नाम से भी जाना जाता है। उनकी 114वीं जयंती के मौके पर उनकी जिंदगी के ऐसे पहलुओं को याद किया जा रहा है, जो जितने प्रेरणादायक हैं, उतने ही दर्द से भरे भी। उनकी जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही—जहां बचपन से ही संघर्ष शुरू हो गया था और उम्र के आखिरी पड़ाव तक उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।
बचपन में ही छिन गया मां का साया
जोहरा सहगल का जन्म 27 अप्रैल 1912 को हुआ था। महज एक साल की उम्र में ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया। इतनी छोटी उम्र में मातृत्व का साया सिर से उठ जाना उनके जीवन का पहला बड़ा दुख था। इसके बाद उनका पालन-पोषण बेहद सख्त माहौल में हुआ, जिसने उनके व्यक्तित्व को मजबूत जरूर बनाया, लेकिन भीतर कहीं न कहीं एक खालीपन हमेशा बना रहा।
कला की दुनिया में बनाई अलग पहचान
जोहरा सहगल ने अपने करियर की शुरुआत डांस और थिएटर से की। उन्होंने मशहूर नर्तक उदय शंकर के साथ काम किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। बाद में उन्होंने फिल्मों और टीवी में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी एक्टिंग में एक खास जीवंतता और ऊर्जा देखने को मिलती थी, जो उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती थी।
प्यार किया तो मचा बवाल
उनकी निजी जिंदगी भी कम उतार-चढ़ाव भरी नहीं रही। उन्होंने एक हिंदू युवक कामेश्वर सहगल से शादी की, जो उस दौर में काफी विवादों का कारण बना। परिवार और समाज दोनों ने इस रिश्ते का विरोध किया, लेकिन जोहरा ने अपने फैसले से पीछे हटना मंजूर नहीं किया। उन्होंने हर विरोध का सामना डटकर किया और अपने प्यार को अंजाम तक पहुंचाया।
पाकिस्तान में बिताए मुश्किल दिन
भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौर में हालात बेहद खराब हो गए थे। जोहरा सहगल कुछ समय के लिए पाकिस्तान भी गईं, लेकिन वहां की परिस्थितियां उनके लिए सुरक्षित नहीं रहीं। जान का खतरा महसूस होने के बाद उन्हें वहां से वापस भारत लौटना पड़ा। यह दौर उनके जीवन का सबसे खतरनाक और डरावना अनुभव माना जाता है।
उम्र के आखिरी पड़ाव तक रहीं सक्रिय
जोहरा सहगल ने 90 साल की उम्र के बाद भी फिल्मों और टीवी में काम करना जारी रखा। उनकी ऊर्जा और जिंदादिली हर किसी के लिए मिसाल थी। उन्होंने साबित किया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और जुनून के आगे हर बाधा छोटी पड़ जाती है।जोहरा सहगल की जिंदगी हमें यह सिखाती है कि चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर हौसला मजबूत हो तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है।
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