
नई दिल्ली: अंतरिक्ष में जाने का सपना अब सिर्फ फाइटर पायलट्स तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले वर्षों में आम नागरिक भी अंतरिक्ष की सैर कर सकेंगे। Indian Space Research Organisation यानी इसरो मानवयुक्त Gaganyaan मिशन के शुरुआती चरण पूरे होने के बाद पहली बार अपने अंतरिक्ष यात्री कैडर को आम लोगों के लिए खोलने की तैयारी में है।
गगनयान के बाद बदलेगा चयन का स्वरूप
इसरो की योजना के मुताबिक, गगनयान मिशन के शुरुआती मिशन सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद अंतरिक्ष यात्रियों के चयन में बड़ा बदलाव किया जाएगा। अब तक जहां केवल भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट्स को चुना गया है, वहीं भविष्य में विज्ञान और तकनीक से जुड़े आम नागरिकों को भी मौका दिया जाएगा। इस प्रस्ताव पर उच्च स्तर पर चर्चा जारी है और इसे भारत के मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।
दूसरे बैच में दिखेगी विविधता, STEM विशेषज्ञों की एंट्री
सूत्रों के अनुसार, दूसरे बैच में कुल 10 अंतरिक्ष यात्री शामिल किए जा सकते हैं। इनमें 6 भारतीय वायुसेना पृष्ठभूमि से होंगे, जबकि 4 नागरिक STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) बैकग्राउंड से चुने जाएंगे। इसका मतलब है कि वैज्ञानिक, इंजीनियर और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स को भी अंतरिक्ष में जाने का सुनहरा अवसर मिलेगा।
हर साल दो मिशन, 4.5 साल का पूरा चक्र
योजना के तहत इसरो हर साल दो मानवयुक्त मिशन लॉन्च करने की दिशा में काम कर रहा है। एक अंतरिक्ष यात्री एक मिशन के बाद करीब दो साल के अंतराल पर फिर से उड़ान भर सकता है। चयन से लेकर प्रशिक्षण और मिशन तैयारी तक का पूरा चक्र लगभग 4.5 साल का होगा।
अंतरिक्ष यात्रियों की संख्या बढ़ाने की तैयारी
इसरो की एक समिति ने शुरुआत में दूसरे बैच के लिए 7 अंतरिक्ष यात्रियों को पर्याप्त माना था, लेकिन भविष्य के अंतरराष्ट्रीय मिशनों और संभावित जरूरतों को देखते हुए यह संख्या बढ़ाकर 10 कर दी गई है। इससे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की बढ़ती महत्वाकांक्षा साफ झलकती है।
सातवें मिशन से बढ़ेगी अंतरिक्ष यात्रियों की संख्या
एक और बड़ा बदलाव सातवें मानवयुक्त मिशन से लागू हो सकता है। इसमें अंतरिक्ष में जाने वाले यात्रियों की संख्या दो से बढ़ाकर तीन करने की योजना है। यह कदम भारत के प्रस्तावित अंतरिक्ष स्टेशन और वैज्ञानिक प्रयोगों की बढ़ती जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।
पहले बैच में शामिल हैं ये चार अनुभवी पायलट
देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्री भारतीय वायुसेना के अनुभवी टेस्ट पायलट हैं। इनमें एयर कमोडोर प्रशांत बी नायर, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन और ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप शामिल हैं। इन्हें तकनीकी दक्षता और सुरक्षा मानकों के आधार पर चुना गया है।
दुनियाभर में रहा है सैन्य पायलट्स का दबदबा
वैश्विक स्तर पर भी अंतरिक्ष एजेंसियों ने शुरुआत में सैन्य पायलट्स को ही प्राथमिकता दी है, क्योंकि शुरुआती मिशनों में उच्च जोखिम और तकनीकी जटिलताएं होती हैं। हालांकि जैसे-जैसे तकनीक विकसित होती है, नागरिक अंतरिक्ष यात्रियों को शामिल किया जाता है—और अब भारत भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
भारत के अंतरिक्ष भविष्य की नई उड़ान
इसरो का यह कदम न सिर्फ भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई दिशा देगा, बल्कि देश के युवाओं और वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी नए अवसर खोलेगा। आने वाले समय में भारत का अंतरिक्ष मिशन और अधिक समावेशी और उन्नत बनने की ओर बढ़ रहा है।
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