हूती विद्रोहियों की बड़ी बढ़त, मोखा के बाद बाब-अल-मंदेब की ओर बढ़े कदम; सऊदी समर्थित सेना पर बढ़ा दबाव

यमन में एक बार फिर हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के तट पर अपनी स्थिति मजबूत करते हुए रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा कर लिया है। इसके बाद हूती लड़ाकों की नजर बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के इलाकों पर बताई जा रही है। यह घटनाक्रम सऊदी अरब के समर्थन वाली यमनी सरकारी सेनाओं के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। साथ ही लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही और वैश्विक व्यापार को लेकर भी नई चिंता पैदा हो गई है।

मोखा पर कब्जे के बाद हूतियों की बढ़ी ताकत

रिपोर्टों के मुताबिक, हूती विद्रोहियों ने पश्चिमी यमन में तेजी से आगे बढ़ते हुए मोखा शहर पर नियंत्रण हासिल किया है। मोखा लाल सागर के किनारे बसा रणनीतिक बंदरगाह है और इसकी भौगोलिक स्थिति इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। शहर बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 80 किलोमीटर की दूरी पर बताया जा रहा है।

मोखा पर कब्जे के बाद हूतियों को लाल सागर के तटीय इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने का मौका मिला है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि हूती लड़ाके तट के साथ आगे बढ़ रहे हैं और रणनीतिक द्वीपों की दिशा में भी उनकी गतिविधियां बढ़ी हैं।

सऊदी समर्थित सेना के सामने बढ़ी चुनौती

हूतियों की इस बढ़त का सीधा असर यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और उसके सहयोगी सशस्त्र गुटों पर पड़ा है। ये सेनाएं लंबे समय से हूती विद्रोहियों को रोकने की कोशिश कर रही हैं और उन्हें सऊदी अरब का समर्थन हासिल है।

ताजा घटनाक्रम में पश्चिमी यमन के कई इलाकों में सरकारी और सहयोगी बलों पर दबाव बढ़ने की खबरें हैं। इससे युद्ध के मोर्चे पर शक्ति संतुलन एक बार फिर हूतियों की तरफ झुकता दिखाई दे रहा है।

इससे पहले भी यमन के पश्चिमी हिस्सों में दोनों पक्षों के बीच भारी संघर्ष हुआ था। हाल की लड़ाई में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई थी और हूतियों पर बाब-अल-मंदेब के करीब अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश का आरोप लगाया गया था। 

क्यों अहम है बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य?

बाब-अल-मंदेब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और इसके जरिए यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच बड़ी मात्रा में व्यापारिक सामान तथा ऊर्जा संसाधनों की आवाजाही होती है।

यही वजह है कि इस इलाके के आसपास किसी भी सैन्य गुट की बढ़ती मौजूदगी का असर केवल यमन तक सीमित नहीं रहता। मोखा पर हूतियों का नियंत्रण उन्हें इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के और करीब ले आया है। इससे जहाजों की सुरक्षा, बीमा लागत और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ सकती है।

सऊदी अरब के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?

हूतियों के साथ सऊदी अरब का टकराव नया नहीं है। यमन के गृहयुद्ध में रियाद लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में रहा है। दूसरी ओर हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है।

अब जब हूती लाल सागर के तट पर अपनी पकड़ बढ़ा रहे हैं, तो सऊदी अरब के लिए चुनौती केवल यमन की जमीन तक सीमित नहीं रह जाती। बाब-अल-मंदेब के करीब हूतियों की सैन्य मौजूदगी क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

लाल सागर में फिर गहरा सकता है संकट

हूतियों और उनके विरोधी बलों के बीच संघर्ष बढ़ने की स्थिति में लाल सागर की शिपिंग पर दबाव बढ़ सकता है। हूती समूह पहले भी लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाने और समुद्री आवाजाही को प्रभावित करने के लिए जाना जाता रहा है।

मोखा पर कब्जे के बाद अगर हूती तटीय इलाकों में अपनी पकड़ और मजबूत करते हैं, तो उन्हें समुद्री मार्ग के करीब रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। यही वजह है कि मौजूदा घटनाक्रम पर क्षेत्रीय शक्तियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है।

2022 के युद्धविराम पर भी मंडराया खतरा

यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थित बलों के बीच लंबे समय तक चले संघर्ष के बाद 2022 में युद्धविराम ने हिंसा को काफी हद तक कम किया था। हालांकि देश में स्थायी राजनीतिक समाधान नहीं निकल सका और तनाव बना रहा।

अब पश्चिमी तट विद्रोही मोखा के बाद कितनी दूर तक अपनी पकड़ बढ़ा पाते हैं और सऊदी समर्थित यमनी बल उनकी बढ़त को रोकने के लिए किस स्तर की सैन्य कार्रवाई करते हैं। बाब-अल-मंदेब के आसपास स्थिति बिगड़ने पर इसका असर यमन से बाहर निकलकर लाल सागर की शिपिंग और वैश्विक व्यापार तक पहुंच पर नए सिरे से सैन्य गतिविधियों और हूतियों की तेजी से बढ़त ने उस नाजुक शांति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर संघर्ष व्यापक रूप लेता है, तो इसका सबसे बड़ा असर यमन की पहले से संकटग्रस्त आबादी पर पड़ सकता है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि हूती विद्रोही मोखा के बाद कितनी दूर तक अपनी पकड़ बढ़ा पाते हैं और सऊदी समर्थित यमनी बल उनकी बढ़त को रोकने के लिए किस स्तर की सैन्य कार्रवाई करते हैं। बाब-अल-मंदेब के आसपास स्थिति बिगड़ने पर इसका असर यमन से बाहर निकलकर लाल सागर की शिपिंग और वैश्विक व्यापार तक पहुंच सकता है।

इसलिए मोखा पर हूतियों का नियंत्रण सिर्फ यमन के एक शहर पर कब्जे की घटना नहीं है। यह लाल सागर क्षेत्र में बदलते सैन्य समीकरण और बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री मार्ग की सुरक्षा से जुड़ा घटनाक्रम है।

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