दांत की फिलिंग के बाद फिर हो गई कैविटी? जानिए इसकी असली वजह, ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी

दांत में कैविटी होने पर आमतौर पर खराब हिस्से को साफ करके वहां फिलिंग कर दी जाती है। इससे दांत को आगे खराब होने से बचाने और उसकी बनावट को बनाए रखने में मदद मिलती है। लेकिन क्या एक बार फिलिंग हो जाने के बाद उस दांत में दोबारा कैविटी नहीं हो सकती? ऐसा जरूरी नहीं है। कई लोगों को कुछ समय बाद उसी दांत या फिलिंग के आसपास फिर से सड़न की समस्या नजर आने लगती है।

ऐसी स्थिति देखकर अक्सर लोगों को लगता है कि शायद फिलिंग ठीक से नहीं हुई या इलाज में कोई कमी रह गई। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक हर बार इसकी वजह खराब फिलिंग नहीं होती। दांतों की सफाई में कमी, फिलिंग के आसपास प्लाक का जमा होना, बार-बार मीठी चीजें खाना-पीना और समय के साथ पुरानी फिलिंग का घिसना या टूटना भी दोबारा कैविटी होने की वजह बन सकता है।

फिलिंग के बाद भी क्यों लौट आती है कैविटी?

कैविटी का इलाज कराने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में उस दांत में सड़न की संभावना पूरी तरह खत्म हो गई। मुंह में मौजूद बैक्टीरिया और प्लाक अगर दांतों की सतह या फिलिंग के किनारों के आसपास दोबारा जमा होने लगें, तो वहां सड़न की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

खासतौर पर जिन लोगों के दांतों में प्लाक ज्यादा बनता है, ओरल हाइजीन ठीक नहीं रहती या जिन्हें पहले भी कई बार कैविटी हो चुकी है, उनमें दोबारा सड़न का जोखिम बना रह सकता है। बार-बार मीठे खाद्य पदार्थ या पेय पदार्थ लेने की आदत भी इस जोखिम को बढ़ा सकती है।

फिलिंग के किनारे जमा प्लाक बन सकता है वजह

फिलिंग के बाद दांत और फिलिंग के बीच या उसके आसपास का हिस्सा साफ रखना बेहद जरूरी है। यदि उस जगह पर प्लाक जमा होता रहे और उसकी सही तरह से सफाई न हो, तो समय के साथ वहां दांतों को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है।

यही कारण है कि फिलिंग कराने के बाद भी रोजाना ओरल हाइजीन पर ध्यान देना जरूरी माना जाता है। सिर्फ कैविटी वाले हिस्से में फिलिंग करा लेना दांतों को भविष्य की हर समस्या से सुरक्षित नहीं करता।

बार-बार मीठा खाना भी बढ़ा सकता है खतरा

दांतों में कैविटी बनने के पीछे खान-पान की आदतों की भी भूमिका हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति दिनभर में बार-बार मीठे खाद्य पदार्थ या शुगर वाले पेय लेता है, तो दांतों पर सड़न पैदा करने वाले बैक्टीरिया के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं।

इसलिए जिन लोगों को पहले कैविटी हो चुकी है, उनके लिए केवल फिलिंग पर निर्भर रहने के बजाय खान-पान और दांतों की नियमित सफाई पर भी ध्यान देना जरूरी है।

पुरानी फिलिंग घिसने या टूटने पर भी हो सकती है समस्या

समय बीतने के साथ दांतों में लगी फिलिंग में भी बदलाव आ सकता है। फिलिंग घिस सकती है, उसमें टूट-फूट हो सकती है या उसके किनारों पर ऐसी जगह बन सकती है जहां प्लाक आसानी से जमा होने लगे।

ऐसी स्थिति में फिलिंग के आसपास दोबारा सड़न विकसित हो सकती है। इसलिए लंबे समय पहले कराई गई फिलिंग में किसी तरह का बदलाव, टूटना या असहजता महसूस होने पर दंत चिकित्सक से जांच कराना उचित रहता है।

इसे सेकेंडरी या रिकरेंट कैरीज कहा जाता है

फिलिंग के आसपास या उसके किनारे दोबारा विकसित होने वाली दांतों की सड़न को Secondary Caries या Recurrent Caries कहा जाता है। इसका संबंध कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है और हर व्यक्ति में इसका जोखिम एक जैसा नहीं होता।

दांतों में पहले से मौजूद कैविटी का इतिहास, मुंह में बनने वाला प्लाक, ओरल हाइजीन, मीठे खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों का बार-बार सेवन तथा फिलिंग की स्थिति जैसे कारक महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

कैविटी से बचने के लिए फिलिंग के बाद भी रखें ध्यान

फिलिंग कराने के बाद यह मान लेना सही नहीं है कि अब उस दांत को कभी कैविटी नहीं होगी। दांतों की नियमित सफाई और ओरल हाइजीन बनाए रखना जरूरी है। साथ ही, बार-बार मीठा खाने-पीने की आदत को नियंत्रित करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

अगर फिलिंग वाला दांत दोबारा दर्द करने लगे, उसमें संवेदनशीलता महसूस हो, फिलिंग टूटती या घिसती दिखाई दे या उसके आसपास कोई नया बदलाव नजर आए, तो दंत चिकित्सक से जांच करानी चाहिए। समय पर समस्या की पहचान होने से आगे होने वाले नुकसान को समझने और उचित उपचार तय करने में मदद मिल सकती है।

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