
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था हमेशा से दुनिया की सबसे कड़ी सुरक्षा व्यवस्थाओं में गिनी जाती है। पुतिन जब किसी दूसरे देश की यात्रा पर जाते हैं तो उनके पहुंचने से पहले ही सुरक्षा से जुड़ी तैयारियां शुरू हो जाती हैं। यही वजह है कि ब्रिक्स समिट के लिए उनके भारत दौरे की चर्चा के बीच उनकी एडवांस सिक्योरिटी टीम भी सुर्खियों में आ गई है। सवाल यह है कि आखिर पुतिन के पहुंचने से पहले उनकी सुरक्षा टीम किस तरह विदेशी जमीन पर अपना नेटवर्क तैयार करती है?
पुतिन से पहले पहुंचती है एडवांस टीम
किसी भी बड़े विदेशी दौरे में राष्ट्राध्यक्ष की सुरक्षा केवल उस समय शुरू नहीं होती जब उनका विमान लैंड करता है। पुतिन जैसे हाई-प्रोफाइल नेता के दौरे के लिए सुरक्षा तैयारियों का एक बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा कर लिया जाता है। उनकी एडवांस सिक्योरिटी टीम संभावित यात्रा मार्ग, कार्यक्रम स्थल और ठहरने वाली जगहों समेत सुरक्षा से जुड़े तमाम पहलुओं का आकलन करती है।
इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि राष्ट्रपति के पहुंचने के समय सुरक्षा व्यवस्था पहले से तैयार रहे और किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल हो।
विदेशी धरती पर भी तैयार होता है सुरक्षा घेरा
पुतिन की सुरक्षा व्यवस्था का एक अहम हिस्सा स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय है। जिस देश में रूसी राष्ट्रपति जाते हैं, वहां की सुरक्षा एजेंसियों के साथ उनकी टीम पहले से संपर्क में रहती है। इसके जरिए यात्रा कार्यक्रम, आवाजाही और कार्यक्रम स्थलों की सुरक्षा को लेकर समन्वय किया जाता है।
रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा को देखते हुए उन स्थानों का भी पहले से निरीक्षण किया जाता है जहां उनका कार्यक्रम प्रस्तावित होता है। इस दौरान सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों की पहचान और उन्हें कम करने के उपायों पर काम किया जाता है।
ब्रिक्स समिट के लिए दिल्ली पहुंचे पुतिन
व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। भारत दौरे के दौरान शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है। दोनों नेताओं की बैठक पर भारत और रूस के रक्षा सहयोग के लिहाज से भी नजरें टिकी हुई हैं।
इस दौरान दो बड़े रक्षा समझौतों को लेकर उम्मीदें जताई जा रही हैं। इनमें रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की पांचवीं रेजिमेंट की बची हुई डिलीवरी और अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस-एनजी यानी नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल के साझा विकास से जुड़ा प्रस्ताव प्रमुख है।
पुतिन के दौरे पर सुरक्षा के साथ रक्षा सौदों पर भी नजर
पुतिन का भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को लेकर भी चर्चा तेज है। एक तरफ रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर भारत-रूस के बीच संभावित रक्षा सहयोग पर भी खास नजर रखी जा रही है।
एस-400 की शेष डिलीवरी और ब्रह्मोस-एनजी से जुड़ी संभावनाएं इस दौरे को रणनीतिक और रक्षा क्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण बना रही हैं। ऐसे में पुतिन की यात्रा केवल कूटनीतिक मुलाकातों तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि भारत-रूस रक्षा संबंधों के अगले चरण के संकेतों के लिए भी इसे अहम माना जा रहा है।
क्यों खास है पुतिन की एडवांस सिक्योरिटी टीम?
राष्ट्रपति की सुरक्षा में सबसे महत्वपूर्ण बात केवल हथियारबंद सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी नहीं होती, बल्कि पहले से तैयार की गई पूरी सुरक्षा व्यवस्था होती है। एडवांस टीम का काम संभावित जोखिमों का आकलन करने, स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय बनाने और राष्ट्रपति के कार्यक्रम के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था को तैयार करने में अहम भूमिका निभाना होता है।
यही वजह है कि पुतिन के किसी विदेशी दौरे के दौरान उनकी सुरक्षा व्यवस्था उनके पहुंचने से काफी पहले सक्रिय हो जाती है। राष्ट्रपति के दिल्ली पहुंचने के साथ ही यह पूरी व्यवस्था और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि उनकी यात्रा के दौरान हर गतिविधि के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है।
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