Hormuz Strait Crisis: लेबनान में इजरायली हमलों से भड़का ईरान, फिर बंद किया होर्मुज जलडमरूमध्य; वैश्विक तेल सप्लाई पर मंडराया बड़ा खतरा

तेहरान। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। लेबनान में संघर्ष विराम (सीजफायर) लागू होने के बावजूद इजरायल की ओर से जारी सैन्य कार्रवाई ने ईरान को कड़ा कदम उठाने के लिए प्रेरित कर दिया है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को दोबारा जहाजों की आवाजाही के लिए बंद करने की घोषणा कर दी है। इस फैसले से वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर व्यापक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

सीजफायर उल्लंघन का आरोप, ईरान ने दिखाई सख्ती

ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देश की शीर्ष संयुक्त सैन्य कमान खतम-अल-अंबिया मुख्यालय ने शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के फैसले की जानकारी दी। सैन्य नेतृत्व का कहना है कि लेबनान में संघर्ष विराम के बावजूद इजरायल द्वारा लगातार हमले किए जा रहे हैं, जिनमें आम नागरिकों की जान जा रही है। ईरान ने इसे शांति समझौते की भावना के खिलाफ बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि संघर्ष विराम को लागू कराने की जिम्मेदारी निभाने में अमेरिका भी विफल रहा है। उनका कहना है कि युद्धविराम को लेकर किए गए आश्वासनों का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण क्षेत्र में हालात फिर से बिगड़ गए हैं।

अमेरिका-ईरान समझौते के बाद बदले हालात

गौरतलब है कि इसी सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने पर सहमति बनी थी। इससे क्षेत्रीय तनाव कम होने और समुद्री व्यापार सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही थी। हालांकि लेबनान में हुए नए हमलों के बाद हालात तेजी से बदल गए और ईरान ने अपना रुख सख्त कर लिया।

ईरान का कहना है कि यदि क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई नहीं रुकी तो वह और भी बड़े कदम उठाने पर विचार कर सकता है। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है।

ईरानी सेना की चेतावनी, आगे भी हो सकती है कार्रवाई

ईरानी सैन्य नेतृत्व ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के फैसले को अपनी प्रतिक्रिया का पहला चरण बताया है। अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि इजरायल की सैन्य कार्रवाई जारी रहती है तो आगे और रणनीतिक कदम उठाए जा सकते हैं।

विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की यह चेतावनी केवल समुद्री मार्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों को भी प्रभावित कर सकती है। इससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में गिना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले बड़े हिस्से का कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस इसी समुद्री मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल कीमतों में उछाल, शिपिंग लागत में वृद्धि और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर एशिया, यूरोप और अमेरिका सहित दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं पर भी दिखाई दे सकता है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ी चिंता

ईरान के इस फैसले के बाद दुनिया भर की निगाहें पश्चिम एशिया पर टिक गई हैं। कई देशों ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने और संघर्ष विराम का सम्मान करने की अपील की है। वहीं वैश्विक बाजारों में भी संभावित ऊर्जा संकट को लेकर चिंता बढ़ गई है।आने वाले दिनों में इजरायल, लेबनान, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उठाया गया यह कदम पूरे क्षेत्र की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है।

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