हिंद महासागर, श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा संकट उभर गया है, जहाँ एक यू.एस. नौसेना की पनडुब्बी (सबमरीन) ने ईरान के फ्रिगेट वर्ग युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो से टारगेट कर डूबा दिया है। घटना के समय जहाज भारत से लौट रहा था और समुद्र में संकट के संकेत (डिस्टेस्स कॉल) के तुरंत बाद यह हमला हुआ। यह हमला भारत-श्रीलंका-अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है।
घटना की दिल दहला देने वाली तस्वीर
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि यह हमला पहली बार विश्व युद्ध 2 के बाद किसी दुश्मन के जहाज को टॉरपीडो से डुबोने जैसा है। इस हादसे में कम से कम 80 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि कई और लापता बताए जा रहे हैं। श्रीलंका की नौसेना ने 32 घायल नाविकों को बचा लिया और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई शव समुद्र से बरामद किए जा चुके हैं और खोज-बचाव अभियान जारी है।
कहाँ और कैसे हुआ हमला?
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स्थान: श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 40 समुद्री मील दक्षिण में, हिंद महासागर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में।
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हमला किसने किया: अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बी द्वारा टॉरपीडो हमला।
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शिप: ईरान का फ्रिगेट IRIS Dena, भारत से लौट रहा था।
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टाइमलाइन: सुबह के शुरुआती घंटों में जहाज ने संकट संकेत भेजा और कुछ समय बाद डूब गया।
बचाव कार्य
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कम से कम 80 मृतक: मरने वालों की संख्या स्थानीय अधिकारियों ने पुष्टि की है।
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100+ लापता: अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार 100 से ज़्यादा नाविक अभी भी गुम हैं।
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32 घायल और बचाए गए: घायल नाविकों का इलाज श्रीलंका के गैले अस्पताल में जारी।
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खोज-बचाव जारी: तेज धाराओं और सीमित दृश्यता की वजह से बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है।
भू-राजनीतिक प्रभाव और तनाव
इस हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव में बढ़ोतरी की संभावना है, खासकर ईरान, अमेरिका और उनके गठबंधन के बीच। यह वारदात ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में पहले से ही संघर्ष और राजनीतिक टकराव की स्थिति बनी हुई है।
ईरान ने अभी तक इस हमले पर आधिकारिक सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, पर कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से प्रतिक्रिया की खबरें आ रही हैं। घटना की अंतरराष्ट्रीय जांच और विस्तृत जानकारी आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
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