Govardhan Parikrama Guide: 21 किलोमीटर की गोवर्धन परिक्रमा का क्या है धार्मिक महत्व? जानिए पूरा मार्ग, प्रमुख पड़ाव, नियम और यात्रा का सही समय

मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राओं में गिनी जाती है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र देव के प्रचंड प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर धारण किया था। इसी दिव्य घटना की स्मृति में लाखों श्रद्धालु हर वर्ष गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा कर भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। लगभग 21 किलोमीटर लंबी इस पवित्र परिक्रमा को पैदल पूरा करने में सामान्यतः 5 से 7 घंटे का समय लगता है।

गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में आते हैं कई पवित्र धार्मिक स्थल

गोवर्धन परिक्रमा मार्ग करीब 21 किलोमीटर लंबा है। इस पूरे रास्ते में अनेक प्राचीन मंदिर, पवित्र कुंड और धार्मिक स्थल स्थित हैं, जहां श्रद्धालु दर्शन-पूजन करते हुए अपनी यात्रा पूरी करते हैं।

परिक्रमा की शुरुआत और समापन प्रायः मानसी गंगा कुंड से होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पवित्र सरोवर भगवान श्रीकृष्ण के मन से प्रकट हुआ था। इसके बाद श्रद्धालु हरिदेव मंदिर में भगवान के दर्शन कर यात्रा को आगे बढ़ाते हैं।

मार्ग में स्थित दान घाटी मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां भक्तजन भगवान को दूध और दान अर्पित कर मनोकामना मांगते हैं। आगे चलकर राधा कुंड और श्यामा कुंड आते हैं, जिन्हें राधा-कृष्ण के दिव्य और शाश्वत प्रेम का प्रतीक माना जाता है। परिक्रमा के अंतिम प्रमुख पड़ाव के रूप में पूनछरी का लौठा स्थित है, जो भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय ग्वाल मित्र की स्मृति से जुड़ा पवित्र स्थल माना जाता है।

श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार करते हैं अलग-अलग प्रकार की परिक्रमा

गोवर्धन परिक्रमा केवल पैदल ही नहीं बल्कि श्रद्धा और शारीरिक क्षमता के अनुसार कई रूपों में की जाती है।

सबसे अधिक प्रचलित सामान्य परिक्रमा है, जिसमें श्रद्धालु लगभग 21 किलोमीटर का पूरा मार्ग पैदल और अधिकांश लोग नंगे पैर तय करते हैं।

इसके अलावा दंडवत परिक्रमा को अत्यंत कठिन और तपस्वी साधना माना जाता है। इसमें श्रद्धालु पूरे मार्ग पर बार-बार दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़ते हैं। इस परिक्रमा को पूरा करने में कई दिनों का समय लग सकता है।

जो श्रद्धालु लंबी दूरी तय करने में सक्षम नहीं होते, उनके लिए छोटी परिक्रमा का विकल्प भी उपलब्ध है। यह मार्ग लगभग 8 से 12 किलोमीटर का माना जाता है।

वहीं बुजुर्गों, दिव्यांग श्रद्धालुओं अथवा समय की कमी होने पर ई-रिक्शा या निजी वाहन से परिक्रमा भी की जाती है, जिसे सुविधाजनक विकल्प माना जाता है।

गोवर्धन परिक्रमा के लिए कौन-सा समय सबसे उपयुक्त माना जाता है?

धार्मिक दृष्टि से गोवर्धन परिक्रमा पूरे वर्ष की जा सकती है, लेकिन मौसम की दृष्टि से अक्टूबर से मार्च के बीच का समय सबसे अनुकूल माना जाता है। विशेष रूप से कार्तिक मास में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और इस दौरान परिक्रमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

सुबह जल्दी निकलना रहता है सबसे बेहतर

गोवर्धन परिक्रमा मार्ग श्रद्धालुओं के लिए 24 घंटे खुला रहता है। हालांकि गर्मी और धूप से बचने के लिए सूर्योदय से पहले या सुबह के समय यात्रा शुरू करना सबसे बेहतर माना जाता है। विशेषकर जो श्रद्धालु नंगे पैर परिक्रमा करते हैं, उनके लिए सुबह का समय अधिक सुविधाजनक रहता है।

परिक्रमा के दौरान इन बातों का रखें विशेष ध्यान

गोवर्धन परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं से धार्मिक मर्यादा और स्वच्छता बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। पूरे मार्ग में साफ-सफाई का ध्यान रखें, धार्मिक स्थलों का सम्मान करें और श्रद्धा के साथ “राधे-राधे” का स्मरण करते हुए यात्रा पूरी करें। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई गोवर्धन परिक्रमा भगवान श्रीकृष्ण की विशेष कृपा का माध्यम बनती है।

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