
Health News: कई लोगों को चलने, खड़े होने या लंबे समय तक बैठने के दौरान कमर से शुरू होकर कूल्हों और पैरों तक तेज दर्द महसूस होता है। कई बार यह दर्द बिजली के झटके जैसा लगता है और इसके साथ झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी भी महसूस होने लगती है। अधिकांश लोग इसे सामान्य मांसपेशियों के खिंचाव का दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह नस दबने (Nerve Compression) या साइटिका (Sciatica) जैसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है। समय पर जांच और उपचार न मिलने पर नस को स्थायी नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
कमर से पैरों तक फैलने वाला दर्द क्यों है चिंता का विषय?
आज के समय में कमर दर्द एक आम समस्या बन चुकी है। हालांकि हर कमर दर्द गंभीर नहीं होता, लेकिन यदि दर्द कमर से शुरू होकर कूल्हों, जांघों, पिंडलियों और पैरों तक पहुंचने लगे तथा इसके साथ झनझनाहट, सुन्नपन या मांसपेशियों में कमजोरी महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार यह नस दबने या साइटिका का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में जल्द चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी माना जाता है, क्योंकि लंबे समय तक नस पर दबाव बने रहने से उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
नस दबना क्या होता है?
चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार नस दबना ऐसी स्थिति है, जब शरीर की किसी नस पर आसपास मौजूद हड्डी, डिस्क, लिगामेंट या मांसपेशियां अतिरिक्त दबाव डालने लगती हैं। यह समस्या सबसे अधिक रीढ़ की हड्डी के आसपास देखने को मिलती है। दबाव बढ़ने पर नस सामान्य रूप से काम नहीं कर पाती, जिससे दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन और कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
किन कारणों से बढ़ता है नस दबने का खतरा?
विशेषज्ञों के मुताबिक रीढ़ की डिस्क का खिसक जाना (हर्नियेटेड डिस्क), उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों में बदलाव, स्पाइनल स्टेनोसिस, चोट, लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठना, अधिक वजन और लगातार भारी सामान उठाना नस दबने की प्रमुख वजहें हो सकती हैं। इन कारणों से नस पर दबाव बढ़ता है और दर्द धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकता है।
डॉक्टर कैसे करते हैं नस दबने की पहचान?
यदि किसी मरीज को कमर से पैरों तक फैलने वाला दर्द, झनझनाहट या कमजोरी महसूस होती है, तो डॉक्टर सबसे पहले उसके लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी लेते हैं। इसके बाद शारीरिक परीक्षण किया जाता है, जिसमें पैरों की ताकत, संवेदनशीलता और रिफ्लेक्स की जांच की जाती है। जरूरत पड़ने पर एमआरआई (MRI), सीटी स्कैन (CT Scan), एक्स-रे (X-Ray) या नर्व कंडक्शन स्टडी (Nerve Conduction Study) जैसी जांच की सलाह दी जा सकती है, ताकि नस पर दबाव की सही स्थिति का पता लगाया जा सके।
किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?
यदि कमर का दर्द लगातार पैरों तक फैल रहा हो, चलने या बैठने में परेशानी हो, पैरों में बार-बार झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो, मांसपेशियों में कमजोरी आने लगे या दर्द लगातार बढ़ता जाए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज शुरू होने से दर्द को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है और नस को होने वाले गंभीर नुकसान से भी बचाव संभव है।
समय पर इलाज क्यों है जरूरी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती चरण में पहचान होने पर दवाओं, फिजियोथेरेपी, जीवनशैली में बदलाव और नियमित व्यायाम के जरिए इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। लेकिन लंबे समय तक लक्षणों को नजरअंदाज करने पर नस को स्थायी नुकसान होने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे चलने-फिरने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए कमर से पैरों तक फैलने वाले दर्द और झनझनाहट को सामान्य समस्या मानने के बजाय समय रहते विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध स्वास्थ्य जानकारी और विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए तथ्यों पर आधारित है। किसी भी लक्षण या स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में स्वयं इलाज करने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
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