भारत और साइप्रस के बीच आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। साइप्रस के राष्ट्रपति Nikos Christodoulides ने कहा है कि साइप्रस भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप, पूर्वी भूमध्य सागर, खाड़ी देशों और उत्तरी अफ्रीका के बाजारों तक पहुंच बनाने का भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी केंद्र बनने को तैयार है।
मुंबई में आयोजित भारत-साइप्रस व्यापार मंच को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स ने घोषणा की कि “साइप्रस बिजनेस सेंटर” आगामी 1 सितंबर से मुंबई में अपना संचालन शुरू कर देगा। माना जा रहा है कि इससे भारतीय निवेशकों और कारोबारियों को यूरोपीय बाजारों में तेजी से विस्तार करने का अवसर मिलेगा।
भारत-यूरोप आर्थिक रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार
राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स ने कहा कि भारत और साइप्रस की साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत और यूरोपीय संघ के बीच आर्थिक सहयोग को भी मजबूत करेगी। उन्होंने दोनों देशों के मजबूत राजनीतिक संबंधों को अब व्यापक आर्थिक भागीदारी में बदलने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि निवेश, व्यापार और संयुक्त व्यावसायिक परियोजनाओं के जरिए दोनों देशों के उद्योगों को वैश्विक स्तर पर नए अवसर मिल सकते हैं। साइप्रस खुद को भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप में प्रवेश का रणनीतिक द्वार बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहा है।
व्यापार, रक्षा और टेक्नोलॉजी सेक्टर में हुए छह अहम समझौते
भारत-साइप्रस व्यापार मंच के दौरान दोनों देशों के उद्योग संगठनों और कंपनियों के बीच छह महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) का आदान-प्रदान भी हुआ। इन समझौतों में व्यापार, रक्षा विनिर्माण, प्रौद्योगिकी सहयोग और निवेश से जुड़े कई क्षेत्र शामिल रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन समझौतों से भारतीय कंपनियों को यूरोप और भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में व्यापार विस्तार का मजबूत प्लेटफॉर्म मिलेगा। वहीं साइप्रस को भी भारतीय बाजार और तकनीकी क्षमता का लाभ मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में जुटे उद्योग जगत के बड़े चेहरे
इस व्यापार मंच में भारत और साइप्रस के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, बड़े कारोबारी समूहों के प्रतिनिधि, उद्योग संगठनों के सदस्य और व्यापारिक नेता शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य फोकस दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को नई दिशा देना रहा।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार मुंबई में साइप्रस बिजनेस सेंटर खुलने से भारतीय स्टार्टअप, टेक कंपनियों और निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में प्रवेश की प्रक्रिया अधिक आसान हो सकती है।
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