China Russia India: क्या बदल रहा है दुनिया का शक्ति संतुलन? पुतिन के ‘राजनीतिक गुरु’ डुगिन ने भारत को लेकर कही बड़ी बात

दुनिया की बदलती भू-राजनीति के बीच रूस के चर्चित राजनीतिक विचारक एलेक्जेंडर डुगिन का एक बयान तेजी से चर्चा में है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी माने जाने वाले डुगिन ने कहा है कि चीन और रूस मिलकर अमेरिका के वैश्विक प्रभाव को चुनौती दे रहे हैं। उनका मानना है कि अगर भारत भी इस धुरी का हिस्सा बनता है तो दुनिया में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है और वैश्विक राजनीति “चार ध्रुवीय व्यवस्था” की ओर बढ़ सकती है।

पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने की कोशिश

एलेक्जेंडर डुगिन ने अपने बयान में कहा कि लंबे समय से अमेरिका और पश्चिमी देशों का दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर दबदबा रहा है। लेकिन अब रूस और चीन इस प्रभाव को पीछे धकेलने की दिशा में काम कर रहे हैं। डुगिन के मुताबिक, मौजूदा समय में दुनिया एक नए भू-राजनीतिक दौर में प्रवेश कर रही है, जहां कई शक्तियां अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि रूस और चीन के बीच बढ़ती साझेदारी केवल आर्थिक या सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संरचना को बदलने की रणनीति का हिस्सा भी है।

भारत की भूमिका क्यों मानी जा रही अहम?

डुगिन ने भारत को दुनिया की उभरती हुई बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि अगर भारत इस समीकरण में शामिल होता है तो दुनिया में चार प्रमुख शक्ति केंद्र बन सकते हैं। उनके अनुसार भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था, रणनीतिक स्थिति और वैश्विक मंच पर बढ़ता प्रभाव उसे बेहद अहम बनाता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत पहले से ही वैश्विक राजनीति में संतुलन बनाने की भूमिका निभा रहा है। भारत अमेरिका, रूस और पश्चिमी देशों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर भी जोर देता रहा है।

रूस-चीन की बढ़ती नजदीकी पर दुनिया की नजर

यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और चीन के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों ने कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एक-दूसरे का समर्थन किया है। वहीं अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच रूस-चीन गठजोड़ को नई वैश्विक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

डुगिन का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया में बहुध्रुवीय व्यवस्था यानी मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर को लेकर बहस तेज हो चुकी है। कई देशों का मानना है कि अब वैश्विक शक्ति केवल अमेरिका और पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं रह सकती।

वैश्विक राजनीति में बढ़ सकती है नई प्रतिस्पर्धा

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत, रूस और चीन के बीच किसी बड़े रणनीतिक समीकरण की स्थिति बनती है तो इसका असर वैश्विक व्यापार, रक्षा नीति और अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर भी पड़ सकता है। हालांकि भारत अब तक अपनी विदेश नीति में संतुलन और रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देता आया है।

डुगिन के बयान ने एक बार फिर इस बहस को तेज कर दिया है कि आने वाले वर्षों में दुनिया की सबसे बड़ी ताकतें कौन होंगी और क्या अमेरिका का एकछत्र प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है।

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