मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर संतुलन साधने की कोशिश में जुट गया है। ईरान और सऊदी अरब के बीच बदलते समीकरणों के बीच पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी की ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के वरिष्ठ कमांडर से हुई मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इस मुलाकात को ऐसे समय में बेहद अहम माना जा रहा है, जब क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा विवाद और पश्चिम एशिया की बदलती रणनीतियां वैश्विक राजनीति को प्रभावित कर रही हैं।
क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने में जुटा पाकिस्तान
पाकिस्तान लंबे समय से ईरान और सऊदी अरब दोनों के साथ अपने रिश्तों को संतुलित रखने की नीति पर काम करता रहा है। एक तरफ सऊदी अरब पाकिस्तान का करीबी सहयोगी और आर्थिक साझेदार माना जाता है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ उसकी लंबी सीमा और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे जुड़े हुए हैं। ऐसे में मोहसिन नकवी की IRGC कमांडर से मुलाकात को पाकिस्तान की संतुलित कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। हाल के महीनों में पाकिस्तान-ईरान सीमा पर कई सुरक्षा घटनाओं के बाद दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाना जरूरी माना जा रहा था।
IRGC कमांडर से मुलाकात क्यों है खास?
IRGC यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ईरान की सबसे प्रभावशाली सैन्य इकाइयों में से एक मानी जाती है। क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा मामलों में इसकी अहम भूमिका रहती है। ऐसे में पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता की सीधे IRGC कमांडर से मुलाकात को सिर्फ औपचारिक बातचीत नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय किसी भी क्षेत्रीय टकराव से खुद को दूर रखते हुए मध्य पूर्व में अपनी कूटनीतिक भूमिका मजबूत करना चाहता है। यही वजह है कि इस्लामाबाद लगातार तेहरान और रियाद दोनों के साथ संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
सऊदी अरब से भी मजबूत रिश्ते बनाए रखने की कोशिश
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से खाड़ी देशों, खासकर सऊदी अरब पर काफी हद तक निर्भर रही है। निवेश, तेल आपूर्ति और आर्थिक सहायता के लिहाज से सऊदी अरब पाकिस्तान का बड़ा सहयोगी माना जाता है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए यह बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति है कि वह ईरान के साथ संबंध मजबूत करे लेकिन सऊदी अरब की नाराजगी भी न झेले।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान की मौजूदा विदेश नीति “बैलेंसिंग डिप्लोमेसी” पर आधारित दिखाई दे रही है। यही कारण है कि इस्लामाबाद दोनों देशों के साथ समान दूरी और संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
मध्य पूर्व की राजनीति पर रहेगी नजर
ईरान, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियां आने वाले समय में पूरे मध्य पूर्व की राजनीति को प्रभावित कर सकती हैं। खासतौर पर सुरक्षा, ऊर्जा और रणनीतिक साझेदारी के मुद्दों पर इन देशों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में मोहसिन नकवी और IRGC कमांडर की यह मुलाकात आने वाले दिनों में और भी बड़े राजनीतिक संकेत दे सकती है।
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