
Washington DC: रूस से तेल खरीदने वाले देशों के खिलाफ अमेरिका ने सख्त आर्थिक कदम उठाने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। अमेरिकी सीनेट में एक संशोधित प्रतिबंध विधेयक (Sanctions Bill) पेश किया गया है, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ (Import Tariff) लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस प्रस्तावित बिल में भारत समेत पांच देशों को संभावित रूप से निशाने पर रखा गया है। यदि यह कानून बन जाता है तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
भारत समेत पांच देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव
प्रस्तावित अमेरिकी बिल के अनुसार भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान ऐसे देश हैं, जिन पर रूस से ऊर्जा आयात जारी रखने की स्थिति में 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य रूस की तेल और गैस से होने वाली आय को सीमित करना है, जिससे उसकी आर्थिक क्षमता और युद्ध संचालन पर प्रभाव पड़े।
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों का मिला समर्थन
यह संशोधित बिल अमेरिकी राजनीति की दोनों प्रमुख पार्टियों—रिपब्लिकन और डेमोक्रेट—के समर्थन के साथ पेश किया गया है। इसे रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को और प्रभावी बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि रूस की ऊर्जा बिक्री से होने वाली आय पर रोक लगाकर उस पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जा सकता है।
रूस के अधिकारियों, शैडो टैंकर और ऊर्जा परियोजनाओं पर भी शिकंजा
प्रस्तावित विधेयक में केवल टैरिफ लगाने की बात ही नहीं कही गई है, बल्कि रूस के कई महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्रों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान रखा गया है। इसके तहत रूसी अधिकारियों, रूस के तथाकथित ‘शैडो टैंकर फ्लीट’, रूसी केंद्रीय बैंक तथा सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने का प्रस्ताव शामिल है।
पहले 500% टैरिफ का प्रस्ताव, बाद में घटाकर किया गया 100%
जानकारी के मुताबिक, इस विधेयक के शुरुआती मसौदे में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। हालांकि बाद में इसमें संशोधन करते हुए इसे घटाकर 100% कर दिया गया। इसके बावजूद यह प्रस्ताव अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से बेहद सख्त माना जा रहा है।
बिल पास हुआ तो बन सकता है ऐतिहासिक फैसला
यदि अमेरिकी कांग्रेस से यह बिल पारित होकर कानून का रूप ले लेता है, तो यह पहली बार होगा जब अमेरिका किसी देश पर केवल इस आधार पर टैरिफ लगाएगा कि वह रूस से तेल खरीदकर उसकी आय बढ़ाने में योगदान दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कदम से वैश्विक ऊर्जा व्यापार, कूटनीतिक संबंधों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
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