
US Attack on Iran: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने मंगलवार रात लगातार चौथे दिन ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखते हुए दक्षिणी ईरान के तटीय शहर सीरिक समेत कई रणनीतिक ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार यह अभियान करीब सात घंटे तक चला, जिसमें ईरान के मिसाइल और ड्रोन लॉन्चिंग ठिकानों, नौसैनिक संसाधनों तथा होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद तटीय रक्षा प्रणाली को निशाना बनाया गया।
सात घंटे तक चला अमेरिकी सैन्य अभियान
CENTCOM की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था, जिन्हें अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। हमलों के दौरान मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, नौसैनिक संसाधन और कोस्टल डिफेंस सिस्टम प्रमुख निशाने पर रहे।
हालांकि, इन हमलों में हुए नुकसान या संभावित हताहतों को लेकर दोनों पक्षों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
ईरान का दावा- अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किया पलटवार
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी अभियान शुरू करने का दावा किया। IRGC के अनुसार बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।
ईरान ने दावा किया कि बहरीन में मौजूद अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट बेस और जॉर्डन के अजराक एयरबेस पर भी हमले किए गए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है और अमेरिका की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
ट्रम्प की ईरान को कड़ी चेतावनी
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को सख्त संदेश देते हुए कहा कि यदि तेहरान समझौते की दिशा में आगे नहीं बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में कार्रवाई और तेज हो सकती है। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगला निशाना बिजलीघर और महत्वपूर्ण पुल जैसे रणनीतिक ढांचे भी हो सकते हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव, दुनिया की नजर हालात पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने पूरे पश्चिम एशिया में तनाव को और गहरा कर दिया है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास जारी गतिविधियों पर वैश्विक समुदाय की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह इलाका अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दोनों देशों के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई के चलते क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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