नई दिल्ली। ‘पीएम कम्प्रोमाइज्ड’ अभियान को लेकर सियासी घमासान के बीच भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर तीखा पलटवार किया है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस को ही “कम्प्रोमाइज्ड पार्टी” करार देते हुए आरोप लगाया कि नेहरू और इंदिरा गांधी के दौर में विदेशी एजेंसियों का भारतीय राजनीति और विदेश नीति पर गहरा प्रभाव था। उन्होंने दावा किया कि सार्वजनिक दस्तावेजों और ऐतिहासिक संदर्भों से संकेत मिलता है कि उस समय देश की संप्रभुता से समझौता किया गया।
‘गुटनिरपेक्ष नीति’ पर सवाल, विदेशी प्रभाव का दावा
त्रिवेदी ने सिलसिलेवार सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कांग्रेस नेतृत्व को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के समय भारत की विदेश नीति को गुटनिरपेक्ष बताया जाता रहा, लेकिन वास्तविकता इससे अलग थी। उनके मुताबिक उस दौर में अमेरिका की खुफिया एजेंसी Central Intelligence Agency (CIA) और सोवियत संघ की KGB का भारत की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था तक प्रभाव था।
बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि विदेशी एजेंसियों के पास दस्तावेजों, धन और यहां तक कि सांसदों तक पहुंच थी। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रभाव नहीं बल्कि “नीतिगत स्तर पर हस्तक्षेप” था।
पीएमओ तक पहुंचने के आरोप
त्रिवेदी ने दावा किया कि नेहरू काल में प्रधानमंत्री सचिवालय की सूचनाएं अमेरिकी एजेंसियों तक पहुंचती थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस समय के कुछ करीबी सहयोगियों के विदेशी संपर्कों पर सवाल उठते रहे। उनके अनुसार, अमेरिकी राजनयिकों द्वारा भारतीय दस्तावेज हासिल करने के दावे भी सामने आए थे।
उन्होंने कहा कि यदि उस समय अमेरिकी एजेंसियां सक्रिय थीं, तो सोवियत खुफिया तंत्र भी पीछे नहीं था। 1960 के दशक में भारत सरकार के विभिन्न विभागों में सोवियत प्रभाव होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि ट्रेड मिशन और सांस्कृतिक मंच “कवर” के रूप में इस्तेमाल किए जाते थे।
इंदिरा गांधी पर सीधे पैसे लेने का आरोप
बीजेपी प्रवक्ता ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व को विदेशी एजेंसियों से आर्थिक सहायता मिली। उन्होंने दावा किया कि CIA से जुड़े धन सीधे कांग्रेस तक पहुंचे और उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक रकम पहुंचने के आरोप सार्वजनिक विमर्श में रहे हैं।
त्रिवेदी ने कहा कि उस दौर में विदेशी एजेंसियों के साथ राजनीतिक सहयोग के बदले आर्थिक लाभ लेने की चर्चाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठीं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कुछ विदेशी राजनयिकों ने सार्वजनिक तौर पर इनकार को “कमजोर” बताया था।
मित्रोखिन आर्काइव का हवाला
बीजेपी नेता ने तथाकथित खुलासों का जिक्र करते हुए कहा कि मित्रोखिन आर्काइव्स में सोवियत एजेंसी के जरिए भारतीय राजनीतिक तंत्र में पैठ और धन के लेन-देन से जुड़े दावे दर्ज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई सांसदों को कथित तौर पर सोवियत स्रोतों से आर्थिक मदद मिलती थी।
त्रिवेदी ने 1970 के दशक के आर्थिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि रुपया-रूबल विनिमय दर में बदलाव जैसे कदम भी बाहरी प्रभाव में लिए गए। उनके मुताबिक यह “नेहरूवियन सोशलिज्म” की आड़ में लिया गया ऐसा रास्ता था जिसने देश की आर्थिक और राजनीतिक दिशा को प्रभावित किया।
कांग्रेस पर सीधा हमला
बीजेपी ने साफ कहा कि जो पार्टी आज प्रधानमंत्री पर ‘कम्प्रोमाइज्ड’ होने का आरोप लगा रही है, उसे अपने अतीत का जवाब देना चाहिए। त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस को पहले उन ऐतिहासिक आरोपों पर स्पष्टीकरण देना चाहिए जिनमें विदेशी एजेंसियों से निकटता और धन लेने की बातें सामने आई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने सियासी पारे को चढ़ा दिया है। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस के केंद्र में रहने वाला है।
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