सूर्य की चाल के साथ बदलें भोजन का समय: आयुर्वेद की इस ‘सन क्लॉक’ डाइट से दूर रहेंगी बीमारियां, जानें किस पहर क्या खाना है सही

नई दिल्ली (डिजिटल डेस्क): क्या आप भी रात 10 बजे डिनर करते हैं या सुबह उठते ही भारी नाश्ता कर लेते हैं? अगर हाँ, तो आप अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर घड़ी की सुइयों से नहीं, बल्कि सूर्य की रोशनी और उसकी तीव्रता से संचालित होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद का मानना है कि दवाओं और सख्त डाइट से बेहतर है कि हम ‘बॉडी सन क्लॉक’ (Body Sun Clock) का सम्मान करें। जब हम सूरज के साथ सामंजस्य बिठाकर खाते हैं, तो हमारा पाचन तंत्र फौलादी बनता है और शरीर खुद-ब-खुद हीलिंग करने लगता है।

जठराग्नि और सूर्य का गहरा कनेक्शन

आयुर्वेद का मूल मंत्र है—’जब सूरज तेज हो, तब खाएं; जब सूरज डूब जाए, तब आराम करें।’ हमारे शरीर के भीतर पाचन की एक अग्नि होती है जिसे ‘जठराग्नि’ कहते हैं। यह अग्नि सूर्य की स्थिति के अनुसार घटती-बढ़ती है। सूरज ढलने के बाद भारी भोजन करने से पाचन तंत्र पर बोझ पड़ता है, जो आगे चलकर मोटापे, डायबिटीज और अपच जैसी बीमारियों की जड़ बनता है।

सुबह का नाश्ता: पाचन की धीमी शुरुआत

सूर्योदय के समय पाचन की अग्नि धीरे-धीरे सुलगना शुरू होती है। इसलिए, सुबह की शुरुआत बहुत हल्के और सादे भोजन से करनी चाहिए।

  • क्या खाएं: हल्दी वाला दूध, पोहा, उपमा, इडली, फल या हल्का दलिया।

  • क्या न खाएं: सुबह-सुबह बहुत ज्यादा तला-भुना या भारी खाना पेट को सुस्त बना सकता है।

दोपहर का भोजन: राजा की तरह करें ‘लंच’

जब सूरज आसमान के ठीक बीच में यानी सबसे ऊपर होता है, तब हमारी ‘जठराग्नि’ सबसे तीव्र होती है। आयुर्वेद के मुताबिक, दोपहर का भोजन दिन का सबसे भारी और पौष्टिक भोजन होना चाहिए।

  • क्या खाएं: दाल-चावल, रोटी-सब्जी, घी वाली खिचड़ी या सांभर-चावल।

  • फायदा: इस समय शरीर भारी से भारी भोजन को भी आसानी से पचा लेता है क्योंकि अग्नि मजबूत होती है।

सूर्यास्त के बाद का नियम: हल्का रखें डिनर

जैसे ही सूरज ढलता है, शरीर की मेटाबॉलिक दर धीमी हो जाती है। शाम को पाचन की आग कमजोर पड़ जाती है, इसलिए रात का खाना हल्का और जल्दी पचने वाला होना चाहिए।

  • क्या खाएं: सूप, मूंग दाल, नरम सब्जियां, या हल्की रोटी-सब्जी।

  • सावधानी: रात में ज्यादा मीठा, मसालेदार या तला-भुना खाना नींद में खलल और वजन बढ़ने का मुख्य कारण है।

भूख के संकेतों को समझें

अक्सर कहा जाता है कि ‘जब भूख लगे तब खाओ’, लेकिन आयुर्वेद इसे अधूरा सच मानता है। आपकी भूख का समय सूरज से जुड़ा होना चाहिए। अगर आपको शाम के समय बहुत ज्यादा भूख लग रही है, तो इसका सीधा मतलब है कि आपने दोपहर में सही पोषण नहीं लिया है। सूरज की लय का पालन करने से न केवल वजन नियंत्रित रहता है, बल्कि मानसिक स्पष्टता और ऊर्जा का स्तर भी बढ़ता है।

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