
पहलगाम आतंकी हमले की जांच में NIA ने बड़ा खुलासा किया है। सप्लीमेंट्री चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद को आरोपी बनाया गया है। जानिए चार्जशीट के बड़े खुलासे और पूरी रिपोर्ट।:- नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के सरगना और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के संस्थापक हाफिज सईद को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी ने उस पर भारत के खिलाफ युद्ध जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने, सीमा पार से आतंकी साजिश रचने और पहलगाम हमले की पूरी योजना में अहम भूमिका निभाने का आरोप लगाया है।
हाफिज सईद पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज
NIA की ओर से दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में हाफिज सईद को व्यक्तिगत तौर पर भी आरोपी बनाया गया है। उसके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। एजेंसी का कहना है कि यह चार्जशीट पहले दाखिल की गई 1,597 पन्नों की चार्जशीट का ही विस्तार है। इससे पहले 15 दिसंबर 2025 को दाखिल पहली चार्जशीट में पाकिस्तान के आतंकी हैंडलर साजिद जट समेत छह आतंकियों को आरोपी बनाया गया था।
22 अप्रैल 2025 को हुआ था पहलगाम का दर्दनाक हमला
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम से करीब 6 किलोमीटर दूर बैसरन घाटी में आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला किया था। इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी। जांच के अनुसार आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म पूछने के बाद गोलीबारी की थी, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया था।
चार्जशीट में सामने आए पांच बड़े खुलासे
NIA की पहली चार्जशीट में कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने इस आतंकी साजिश की गहराई को उजागर किया।
रियल टाइम में पाकिस्तान से मिल रहे थे निर्देश
जांच एजेंसी के मुताबिक लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी सैफुल्लाह उर्फ साजिद जट उर्फ लंगड़ा इस हमले का मास्टरमाइंड था। वह पाकिस्तान के लाहौर के कसूर क्षेत्र से आतंकियों को लगातार रियल टाइम निर्देश दे रहा था। उसी ने बैसरन घाटी की लोकेशन साझा की और हमले के दौरान भी आतंकियों के संपर्क में बना रहा।
दो स्थानीय गाइडों ने देखे थे आतंकी
चार्जशीट में दावा किया गया है कि स्थानीय टूरिस्ट गाइड परवेज अहमद जोठार और बशीर अहमद जोठार ने हमले से पहले आतंकियों को बैसरन इलाके में देखा था। हालांकि उन्होंने समय रहते सुरक्षा एजेंसियों को इसकी सूचना नहीं दी। जांच के दौरान दोनों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
हमले से पहले झोपड़ी में खाया खाना
जांच में सामने आया कि हमले से एक दिन पहले तीनों आतंकी एक स्थानीय गाइड की झोपड़ी में पहुंचे थे, जहां उन्होंने मदद के नाम पर भोजन किया। जाते समय वे रोटी और सब्जी भी साथ ले गए। हमले से ठीक पहले उन्होंने बैसरन घाटी में एक पेड़ के नीचे बैठकर खाना खाया और वारदात के बाद धार्मिक नारे लगाते हुए हर्ष फायरिंग की।
चीन के रास्ते आतंकियों तक पहुंचा गो-प्रो कैमरा
NIA के अनुसार हमले की रिकॉर्डिंग के लिए इस्तेमाल किया गया गो-प्रो कैमरा अमेरिका में निर्मित था, लेकिन वह चीन के रास्ते आतंकियों तक पहुंचा। यह कैमरा बाद में जुलाई 2025 में दाचीगाम के जंगलों में हुई मुठभेड़ के दौरान बरामद किया गया था।
कराची और लाहौर की सप्लाई चेन से आए मोबाइल
जांच एजेंसी ने बताया कि आतंकियों के पास से बरामद RedMi 9T और RedMi Note 12 मोबाइल पाकिस्तान की कराची-लाहौर सप्लाई चेन के जरिए उपलब्ध कराए गए थे। फोरेंसिक जांच में इन मोबाइलों के नेविगेशन ऐप से बैसरन घाटी की लोकेशन, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल सबूत मिले, जिससे स्पष्ट हुआ कि हमले की पहले से रेकी और विस्तृत योजना बनाई गई थी।
पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकी मारे जा चुके
NIA के मुताबिक पहलगाम आतंकी हमले में शामिल पाकिस्तान के आतंकी फैसल जट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान भाई और हमजा अफगानी को 28 जुलाई 2025 को सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था। वहीं इस पूरे नेटवर्क का प्रमुख हैंडलर साजिद जट उर्फ लंगड़ा अब भी भारत के सबसे वांछित आतंकियों में शामिल है और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित है।
जांच में लगातार जुड़ रहे नए सबूत
NIA का कहना है कि सप्लीमेंट्री चार्जशीट के जरिए जांच में मिले नए डिजिटल, फोरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। एजेंसी का दावा है कि इन साक्ष्यों से सीमा पार बैठे आतंकियों की भूमिका और पहलगाम हमले की साजिश के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को मजबूत आधार मिला है। मामले की जांच अभी भी जारी है और आने वाले समय में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।
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