ईद के बाद पाकिस्तान में बड़ा खेल! लश्कर कमांडर बिलाल सलाफी की गोली-चाकू से हत्या, उसी मुरीदके में मिला अंजाम जहां भारत ने किया था सर्जिकल वार

इस्लामाबाद/मुरीदके: पाकिस्तान में आतंक के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर बिलाल अहमद सलाफी की हत्या कर दी गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईद की नमाज के तुरंत बाद अज्ञात हमलावरों ने उसे निशाना बनाते हुए गोली मारने के साथ चाकू से हमला किया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह वारदात मुरीदके में हुई—वही इलाका जहां पहले भारतीय सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन के दौरान लश्कर के ठिकाने को तबाह किया था।


ईद की नमाज के बाद बना निशाना

सूत्रों के मुताबिक, बिलाल सलाफी नमाज अदा कर बाहर निकला ही था कि हमलावरों ने उसे घेर लिया। अचानक हुए इस हमले में पहले फायरिंग की गई और फिर चाकू से वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया गया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। सुरक्षा एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और संदिग्धों को हिरासत में लेने की खबर है।


लश्कर में भर्ती और ब्रेनवॉश की जिम्मेदारी

बताया जा रहा है कि बिलाल सलाफी लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके नेटवर्क में अहम भूमिका निभाता था। उसका मुख्य काम युवाओं की पहचान कर उन्हें आतंकी संगठन में शामिल करना था। वह कथित तौर पर युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें ट्रेनिंग के लिए तैयार करता था। हालांकि, वह भारत में किसी बड़े मामले में वांछित सूची में शामिल नहीं था, लेकिन संगठन के लिए उसकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती थी।


हत्या के पीछे क्या है कारण?

फिलहाल हत्या के पीछे की असली वजह साफ नहीं हो सकी है। शुरुआती जांच में इसे आपसी या पारिवारिक विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से जांच कर रही हैं, क्योंकि आतंकी संगठनों के भीतर आपसी रंजिश भी अक्सर हिंसा का कारण बनती रही है।


आतंकवाद का गढ़ बना पाकिस्तान, खुद ही बन रहा शिकार

पाकिस्तान, जिसने वर्षों तक आतंकवाद को पनाह दी, अब खुद उसी का सबसे बड़ा शिकार बनता दिख रहा है। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया का सबसे ज्यादा आतंक प्रभावित देश बन चुका है। साल 2025 में यहां 1000 से अधिक आतंकी हमले दर्ज किए गए, जिनमें हजारों लोग मारे गए और घायल हुए।


टीटीपी से बढ़ी मुश्किलें, सीमाओं पर तनाव

देश के भीतर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। खासतौर पर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हालात बेहद खराब हैं। टीटीपी के लगातार हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। वहीं, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर टीटीपी को समर्थन देने के आरोपों के चलते दोनों देशों के बीच तनाव भी बढ़ा है।


ईद के बीच भी नहीं थमा संघर्ष

हालांकि ईद के मौके पर संघर्ष रोकने की सहमति बनी थी, लेकिन उससे पहले दोनों पक्षों के बीच कई बार सीधा टकराव देखने को मिला। पाकिस्तान द्वारा काबुल में किए गए हवाई हमले और उसके जवाब में ड्रोन अटैक ने हालात और तनावपूर्ण बना दिए थे।

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