नसों पर पड़ रहा है दबाव तो शरीर में महसूस होगी बिजली जैसी झनझनाहट, जानिए कब बन सकती है यह गंभीर बीमारी का संकेत

कई बार लंबे समय तक एक ही जगह बैठने, हाथ के नीचे दबाव पड़ने या पैर सुन्न होने के बाद शरीर के किसी हिस्से में अचानक बिजली के करंट जैसी झनझनाहट महसूस होने लगती है। आमतौर पर कुछ समय बाद यह परेशानी अपने आप ठीक हो जाती है, इसलिए लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर हाथ-पैरों में झनझनाहट बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे तो यह शरीर में छिपी किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में होने वाली इस तरह की सनसनाहट को मेडिकल भाषा में पैरेस्थीसिया (Paresthesia) कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को सुई चुभने जैसा एहसास, जलन, झुनझुनी, सुन्नपन या बिजली दौड़ने जैसी अनुभूति हो सकती है। यह समस्या नसों से जुड़ी गड़बड़ी, विटामिन की कमी या कुछ न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के कारण भी हो सकती है।

हाथ-पैरों में बिजली जैसी झनझनाहट क्यों होती है?

शरीर की नसें मस्तिष्क और शरीर के अलग-अलग हिस्सों के बीच संदेश पहुंचाने का काम करती हैं। जब किसी वजह से नसों पर दबाव पड़ता है या उनके काम करने की क्षमता प्रभावित होती है तो संदेशों के आदान-प्रदान में बाधा आने लगती है। इसी कारण शरीर के किसी हिस्से में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो सकती है।

कई बार पैरों को लंबे समय तक एक ही स्थिति में रखने, हाथ पर सिर रखकर सोने या किसी अंग पर लगातार दबाव पड़ने से नसें कुछ समय के लिए दब जाती हैं। इस वजह से उस हिस्से में खून का प्रवाह और नसों के संकेत प्रभावित होते हैं और करंट जैसी झनझनाहट महसूस होने लगती है।

बार-बार झनझनाहट होना इन बीमारियों का हो सकता है संकेत

अगर शरीर में झनझनाहट बार-बार हो रही है तो इसे सिर्फ सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के मुताबिक यह कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है।

डायबिटीज में नसों को नुकसान पहुंचने के कारण हाथ और पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन की शिकायत आम हो सकती है। इसके अलावा विटामिन बी12 की कमी, नसों पर दबाव, सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस, रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं और मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में भी यह लक्षण दिखाई दे सकता है।

नसों पर दबाव पड़ने से कैसे बढ़ती है परेशानी?

जब किसी नस पर लंबे समय तक दबाव पड़ता है तो वह सही तरीके से संकेत भेजने में परेशानी महसूस करने लगती है। शुरुआत में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो सकता है, लेकिन लंबे समय तक समस्या रहने पर दर्द, कमजोरी या शरीर के किसी हिस्से की कार्यक्षमता प्रभावित होने जैसी दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं।

रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानियों में भी नसों पर दबाव बढ़ सकता है। खासतौर पर गर्दन और कमर की नसों पर असर पड़ने से हाथ या पैरों में झनझनाहट महसूस हो सकती है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है?

अगर झनझनाहट कभी-कभार होती है और कुछ समय बाद ठीक हो जाती है तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती। लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है, बार-बार लौटती है, शरीर के एक ही हिस्से में महसूस होती है या इसके साथ कमजोरी, तेज दर्द, चलने में परेशानी या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।समय रहते जांच कराने से नसों से जुड़ी समस्याओं का कारण पता लगाया जा सकता है और सही इलाज शुरू किया जा सकता है।

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