
नई दिल्ली। देश में नशे और आतंक के गठजोड़ पर एक बार फिर बड़ा वार करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने ‘ऑपरेशन रेजपिल’ को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी बताया है। उन्होंने जानकारी दी कि जांच एजेंसियों ने बेहद खतरनाक और जिहादी नेटवर्क से जुड़े कैप्टागन ड्रग्स की बड़ी खेप जब्त की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 182 करोड़ रुपये आंकी गई है।
आतंक और ड्रग्स के गठजोड़ पर सरकार का बड़ा एक्शन
अमित शाह ने कहा कि देश की सुरक्षा एजेंसियां लगातार उन नेटवर्क्स पर नजर बनाए हुए हैं, जो ड्रग्स के जरिए आतंकवादी गतिविधियों को फंडिंग पहुंचाने का काम करते हैं। ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के तहत की गई कार्रवाई इसी दिशा में एक अहम कदम है। गृह मंत्री ने साफ कहा कि मोदी सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत देश विरोधी गतिविधियों में शामिल किसी भी नेटवर्क को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने बताया कि जब्त किया गया कैप्टागन ड्रग्स बेहद खतरनाक श्रेणी का माना जाता है और इसका इस्तेमाल कई आतंकी संगठनों द्वारा फंडिंग तथा अवैध गतिविधियों में किया जाता रहा है। एजेंसियों की सतर्कता के चलते इतनी बड़ी खेप को समय रहते पकड़ लिया गया।
क्या है कैप्टागन ड्रग्स?
कैप्टागन एक सिंथेटिक ड्रग है, जिसे कई देशों में प्रतिबंधित किया जा चुका है। इसे “जिहादी ड्रग” भी कहा जाता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में कई आतंकी संगठनों के साथ इसका संबंध सामने आ चुका है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक यह ड्रग न केवल अवैध कारोबार को बढ़ावा देता है, बल्कि इससे आतंकवादी नेटवर्क को आर्थिक मदद भी मिलती है।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का मजबूत संदेश
गृह मंत्री ने इस कार्रवाई को देश की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत सरकार नशे के कारोबार और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने जांच एजेंसियों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मुस्तैदी से देश में बड़े खतरे को टालने में सफलता मिली है।
सरकार का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट और आतंक से जुड़े मॉड्यूल्स को बड़ा झटका लगेगा। सुरक्षा एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और कनेक्शनों की भी गहन जांच कर रही हैं।
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