उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में भारत सेवाश्रम संघ की काशी शाखा के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रवाद, धर्म और सनातन संस्कृति की रक्षा पर जोरदार बयान दिया है। अपने ओजस्वी अंदाज में सीएम योगी ने कहा कि एक संन्यासी और राष्ट्रभक्त के जीवन का मुख्य उद्देश्य धर्म की रक्षा होना चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि “धन के निमित्त धर्म नहीं त्यागूंगा, छिड़ गया युद्ध तो बम-गोले भी दागूंगा।”
राष्ट्रवाद और धर्म रक्षा को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
वाराणसी में आयोजित इस ऐतिहासिक शताब्दी समारोह में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश और धर्म की रक्षा के लिए जो भी त्याग किया जाता है, वह महान होता है। उन्होंने कहा कि संतो और राष्ट्रसेवियों को अपने जीवन को इसी महानता के लिए समर्पित करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने मूल्यों, सिद्धांतों और राष्ट्रवाद से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
स्वामी प्रणवानंद जी के योगदान को किया याद
इस दौरान सीएम योगी ने भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक और महान राष्ट्रवादी साधक पूज्य स्वामी प्रणवानंद जी महाराज के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि ठीक 100 साल पहले, वर्ष 1926 में इसी काशी की पावन धरती पर स्वामी प्रणवानंद जी ने इस संघ की नींव रखी थी।
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि जब देश पर अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरें थीं, तब स्वामी जी ने देश के कोने-कोने में जाकर स्वतंत्रता की अलख जगाई थी और हिंदू जागरण के माध्यम से एक सशक्त व स्वतंत्र भारत की संकल्पना को साकार करने में अहम भूमिका निभाई थी। आज यह संस्था न केवल भारत में, बल्कि दुनिया के कई देशों में सनातन मूल्यों और ऋषि परंपरा का प्रचार-प्रसार कर रही है।
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