देश की बैंकिंग व्यवस्था और IDBI बैंक के निजीकरण/विनिवेश को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। अखिलेश यादव द्वारा केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए जाने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तीखा पलटवार करते हुए इसे अखिलेश यादव के ‘घड़ियाली आंसू’ करार दिया और यूपीए (UPA) शासनकाल के बैंकिंग संकट की याद दिलाई।
अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर साधा था निशाना
दरअसल, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने IDBI बैंक और सरकारी संपत्तियों को लेकर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और निजीकरण के कदमों पर तंज कसा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार देश के प्रमुख सरकारी संस्थानों और बैंकों को निजी हाथों में सौंपकर आम जनता और कर्मचारियों के हितों के साथ खिलवाड़ कर रही है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का पलटवार: UPA दौर के ‘फोन बैंकिंग’ घोटाले का किया जिक्र
अखिलेश यादव के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पलटवार किया और कहा कि जो लोग आज बैंकिंग क्षेत्र को लेकर चिंता जता रहे हैं, वे यूपीए सरकार के दौरान हुए एनपीए (NPA) संकट पर चुप क्यों थे। वित्त मंत्री ने कहा कि कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों के शासनकाल में राजनीतिक प्रभाव से बांटे गए ‘फोन बैंकिंग’ लोन के कारण देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक डूबने की कगार पर पहुंच गए थे।
निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार ने पिछले दस वर्षों में कड़े वित्तीय सुधारों के जरिए देश के बैंकिग सेक्टर को न केवल उबारा है, बल्कि बैंकों को रिकॉर्ड मुनाफे में लाकर खड़ा किया है। उन्होंने सपा प्रमुख पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता सब समझती है और इस तरह के राजनीतिक बयानों से UPA काल की आर्थिक नाकामियों को छुपाया नहीं जा सकता।
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