सिवनी के SNCU में 6 महीने में 80 नवजातों की मौत: भाजपा विधायक के औचक निरीक्षण के बाद हटाए गए प्रभारी, जांच के लिए बनी कमेटी

मध्य प्रदेश के सिवनी जिले से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU – एसएनसीयू) में पिछले छह महीनों के भीतर 80 नवजात शिशुओं की मौत का मामला उजागर हुआ है। इस गंभीर लापरवाही और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है, और एसएनसीयू के प्रभारी को उनके पद से हटा दिया गया है।

विधायक के औचक निरीक्षण के बाद हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, सिवनी से भाजपा विधायक दिनेश राय ‘मुनमुन’ ने हाल ही में जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान वार्ड की व्यवस्थाओं और बच्चों की मौतों के आंकड़ों को लेकर गंभीर खामियां सामने आईं, जिसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत सीधे मुख्यमंत्री से की थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. पंकज दुबे ने एक उच्च स्तरीय जांच दल का गठन किया। जांच रिपोर्ट के आधार पर मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए एसएनसीयू के प्रभारी डॉ. पारस पटेरिया को पद से हटा दिया गया और उनकी जगह शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विनोद दहायत को नया प्रभार सौंप दिया गया है।

जांच में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े और कारण

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पंकज दुबे और सिविल सर्जन डॉ. विनोद नावकर द्वारा की गई जांच में यह बात सामने आई कि 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच एसएनसीयू में कुल 1088 नवजात शिशुओं को भर्ती कराया गया था, जिनमें से 80 बच्चों की मौत हो गई।

जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • कम वजन के बच्चे: मृत 80 बच्चों में से 60 बच्चों का वजन सामान्य से काफी कम था। इनमें से 44 शिशु ऐसे थे जिनका वजन मात्र 400 से 1500 ग्राम के बीच था।

  • समय से पहले जन्म (Premature): मृत बच्चों में से 58 बच्चे प्री-मैच्योर (समय पूर्व जन्मे) थे।

  • ऑक्सीजन की कमी: 22 शिशुओं को जन्म के वक्त मस्तिष्क में गंभीर ऑक्सीजन की कमी (Asphyxia) और रक्त संचार अवरोध की वजह से भर्ती कराया गया था।

  • इनमें से 39 नवजात ऐसे थे जिनका जन्म खुद सिवनी जिला अस्पताल में ही हुआ था।

स्वास्थ्य विभाग अब इस पूरी घटना की गहराई से पड़ताल कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके।

Check Also

नाव में छेद, ओवरलोडिंग और गंगा में समा गए सपने: हाजीपुर दर्दनाक हादसे में एक साथ उठे 13 मासूमों के जनाजे

बिहार के वैशाली जिले के हाजीपुर से एक दिल दहला देने वाली और दुखद घटना …