उत्तर प्रदेश के चर्चित मेरठ सौरभ हत्याकांड में अदालत ने बहुप्रतीक्षित और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य अभियुक्तों मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने दोनों को इस जघन्य हत्याकांड का दोषी करार देते हुए यह कड़ा दंड दिया है। फैसले के वक्त कोर्ट रूम का माहौल पूरी तरह बदल गया और सजा सुनते ही वकीलों ने जोरदार तालियां बजाते हुए ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए।
सुनवाई के दौरान मुस्कान ने बेटियों का दिया हवाला, साहिल रहा गुमसुम
मंगलवार को सुबह 10 बजे से ही जिला कारागार से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मुस्कान और साहिल को अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान मुस्कान अपनी बेटी को गोद में लिए हुए थी। जिला जज ने जब दोनों से स्वास्थ्य और सफाई में कुछ कहने के लिए पूछा, तो मुस्कान फूट-फूटकर रो पड़ी। उसने अपनी दो छोटी मासूम बेटियों का हवाला देते हुए जज से रहम की गुहार लगाई और कहा कि बच्चों को ध्यान में रखकर न्याय किया जाए। वहीं दूसरी ओर, सह-अभियुक्त साहिल पूरे समय पूरी तरह गुमसुम और खामोश खड़ा रहा। अंत में दोनों ने अदालत के न्याय पर भरोसा जताने की बात कही।
दोनों पक्षों के बीच चली लंबी बहस, कोर्ट ने तय किया मृत्युदंड
अदालत में शासकीय अधिवक्ता (DGC) केके चौबे और बचाव पक्ष की अधिवक्ता रेखा जैन के बीच करीब सवा घंटे तक तीखी बहस चली। बचाव पक्ष ने नरमी बरतने की दलील दी, जबकि शासकीय अधिवक्ता ने साक्ष्यों और पुरानी घटनाओं के उदाहरण पेश करते हुए दोनों के लिए फांसी की सजा की मांग की।
शाम को 4:05 बजे जब जिला जज अरविंद कुमार मिश्र कोर्ट में पहुंचे, तो उन्होंने बीएनएस (BNS) की धारा 103(1) के साथ धारा 3(5) के तहत दोनों को हत्या का दोषी मानते हुए मृत्युदंड और 50-50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा, धारा 238(ए) के तहत साक्ष्य मिटाने के जुर्म में 7-7 साल के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मृत्युदंड का यह निष्पादक माननीय उच्च न्यायालय की पुष्टि के अधीन रहेगा।
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