
बरेली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। प्रमुख मुस्लिम संगठन ‘ऑल इंडिया मुस्लिम जमात’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज की खुलकर सराहना की है। मौलाना बरेलवी ने न केवल योगी सरकार की नीतियों को सराहा, बल्कि उनकी तुलना पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से करते हुए योगी आदित्यनाथ को एक बेहतर और न्यायप्रिय मुख्यमंत्री बताया है।
योगी राज में सुरक्षित हैं मजार और मदरसे: मौलाना बरेलवी
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और धार्मिक स्थलों की स्थिति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में मुस्लिमों के खिलाफ कोई पक्षपाती कार्रवाई नहीं हुई है।”
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उत्तराखंड से तुलना: बरेलवी ने उत्तराखंड की धामी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वहां उनके कार्यकाल में लगभग 125 मजारों पर बुलडोजर चलाया गया।
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यूपी का उदाहरण: इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि सीएम योगी के राज में किसी भी वैध मजार या मदरसे को निशाना नहीं बनाया गया है। उन्होंने ममलुकुर रहमान (दिवंगत सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के पुत्र) को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के कामकाज को देखना चाहिए, तब उन्हें एहसास होगा कि योगी आदित्यनाथ कितने कुशल मुख्यमंत्री हैं।
अखिलेश यादव पर लगाया ‘एहसान फरामोशी’ का आरोप
यह पहली बार नहीं है जब मौलाना बरेलवी अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इससे पहले उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला था।
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आजम खान का मुद्दा: मौलाना ने कहा कि आजम खान ने सपा को अपने खून-पसीने से सींचा और मुलायम सिंह यादव को ‘मुल्ला मुलायम’ की छवि दिलाकर सत्ता तक पहुंचाया।
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टीपू से सुल्तान: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आजम खान की वजह से ही अखिलेश यादव ‘टीपू से सुल्तान’ बने, लेकिन मुश्किल घड़ी में अखिलेश ने आजम खान को अकेला छोड़कर ‘एहसान फरामोशी’ की है। बरेलवी के अनुसार, यह धोखेबाजी उत्तर प्रदेश के इतिहास में काले अक्षरों में लिखी जाएगी।
मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण पर बदले सुर?
राजनीतिक विश्लेषक मौलाना बरेलवी के इस बयान को यूपी की बदलती सियासत से जोड़कर देख रहे हैं। एक तरफ जहां विपक्ष योगी सरकार पर हमलावर रहता है, वहीं एक बड़े मुस्लिम संगठन के प्रमुख द्वारा ‘योगी’ की तारीफ करना भाजपा के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। मौलाना ने स्पष्ट किया कि मुसलमानों के सामने वोटों की भीख मांगने वाले नेताओं ने सत्ता मिलने के बाद उन्हें भुला दिया, जबकि योगी आदित्यनाथ अपनी नीतियों पर अडिग रहकर काम कर रहे हैं।
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