
नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में भारत आने की संभावना को लेकर कूटनीतिक हलकों में हलचल तेज है। भारत इस साल BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है और सम्मेलन 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में प्रस्तावित है। कई रिपोर्टों में जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल होने की संभावना जताई गई है, लेकिन बीजिंग की ओर से अब तक उनकी भारत यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। यही वजह है कि चीन के रुख को लेकर सस्पेंस लगातार बना हुआ है।
सात साल बाद भारत आने की चर्चा, फिर भी आधिकारिक ऐलान नहीं
अगर शी जिनपिंग BRICS Summit 2026 के लिए नई दिल्ली पहुंचते हैं तो यह करीब सात साल में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। इससे पहले वह 2019 में भारत आए थे। रिपोर्टों के मुताबिक इस बार चीनी राष्ट्रपति के साथ एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी भारत आ सकता है। कुछ रिपोर्टों में करीब 400 लोगों के प्रतिनिधिमंडल की संभावना बताई गई है।
दिलचस्प बात यह है कि जिनपिंग की यात्रा को लेकर चर्चाएं तेज होने के बावजूद चीन ने उनकी मौजूदगी पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है। यही स्थिति इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन का यह इंतजार महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश का हिस्सा भी हो सकता है।
BRICS पर चीन ने समर्थन दिया, जिनपिंग पर चुप्पी क्यों?
चीन भारत की BRICS अध्यक्षता और सम्मेलन के सफल आयोजन का समर्थन कर चुका है। लेकिन जब सवाल सीधे शी जिनपिंग के नई दिल्ली आने का आता है तो बीजिंग का जवाब अब तक स्पष्ट नहीं रहा है। यह अंतर इसलिए भी अहम है क्योंकि BRICS जैसे बहुपक्षीय मंच पर चीन और भारत दोनों प्रमुख सदस्य हैं और दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की संभावित मुलाकात का व्यापक कूटनीतिक असर हो सकता है।
विशेषज्ञों की एक राय यह है कि चीन जानबूझकर अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोल रहा है। इससे बीजिंग के पास अंतिम समय तक परिस्थितियों के मुताबिक अपना रुख तय करने की गुंजाइश बनी रहती है। भारत के साथ संबंधों में सुधार के संकेतों के बीच यह रणनीति चीन को बातचीत में अतिरिक्त कूटनीतिक जगह दे सकती है।
भारत-चीन रिश्तों में नरमी, लेकिन सीमा विवाद अभी खत्म नहीं
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा ऐसे समय में सामने आई है जब नई दिल्ली और बीजिंग के रिश्तों में 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पैदा हुआ तनाव धीरे-धीरे कम करने की कोशिश जारी है। दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत चल रही है, लेकिन वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
हाल के दिनों में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बातचीत भी हुई है। इस संवाद का फोकस भारत-चीन सीमा विवाद और दोनों देशों के बीच शांति एवं स्थिरता बनाए रखने जैसे मुद्दों पर रहा। ऐसे में BRICS सम्मेलन से पहले दोनों पक्षों के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क को काफी अहम माना जा रहा है।
मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर भी टिकी निगाहें
यदि जिनपिंग नई दिल्ली आते हैं तो सबसे बड़ा सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी संभावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर होगा। दोनों नेताओं की मुलाकात भारत-चीन संबंधों को लेकर आगे की दिशा का संकेत दे सकती है।
पिछले कुछ समय में दोनों देशों ने तनाव कम करने और संवाद बढ़ाने की कोशिश की है। ऐसे में BRICS का मंच केवल बहुपक्षीय सहयोग तक सीमित न रहकर भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय बातचीत का अवसर भी बन सकता है। हालांकि, किसी संभावित बैठक के एजेंडे या परिणाम को लेकर अभी निश्चित तौर पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
जिनपिंग के लिए BRICS क्यों अहम है?
BRICS अब पहले के मुकाबले कहीं बड़ा और अधिक प्रभावशाली समूह बन चुका है। ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार, आर्थिक व्यवस्था और भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, चीन के लिए इस मंच पर अपनी भूमिका को मजबूत बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
भारत की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, विकास और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है। भारत BRICS की आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। हाल ही में जयपुर में BRICS ट्रेड मिनिस्टर्स की बैठक के दौरान BRICS Economic Partnership 2030 की रणनीति को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति का उल्लेख किया गया |
क्या चीन आखिरी वक्त तक बनाए रखेगा सस्पेंस?
शी जिनपिंग की भारत यात्रा को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि चीन आधिकारिक घोषणा में इतनी सावधानी क्यों बरत रहा है। विश्लेषकों के मुताबिक, बीजिंग के लिए भारत के साथ संबंधों में सुधार और सीमा विवाद दोनों ही संवेदनशील मुद्दे हैं। इसलिए चीन शायद पहले कूटनीतिक और रणनीतिक परिस्थितियों का आकलन करना चाहता है।
दूसरी तरफ, भारत भी सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों में आगे बढ़ने की महत्वपूर्ण शर्त मानता रहा है। ऐसे में जिनपिंग की संभावित दिल्ली यात्रा केवल BRICS बैठक में भागीदारी नहीं होगी, बल्कि इसे भारत-चीन संबंधों की दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत के तौर पर भी देखा जाएगा।
फिलहाल तस्वीर इतनी ही साफ है कि शी जिनपिंग के भारत आने की संभावना मजबूत बताई जा रही है, लेकिन चीन ने उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यही अनिश्चितता BRICS Summit 2026 से पहले कूटनीतिक उत्सुकता को और बढ़ा रही है।
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