ऑपरेशन सिंदूर पर फिर गरमाई राजनीति, पूर्व CDS अनिल चौहान के बयान से घिरी सरकार; जयराम रमेश ने उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान की ओर से हाल में दिए गए बयानों के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी जानकारियों और पूर्व CDS के बयानों पर सवाल उठाए हैं।

जयराम रमेश ने एक्स पर उठाया मुद्दा

जयराम रमेश ने कहा कि 30 मई 2025 को सिंगापुर में दिए गए एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान तत्कालीन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर कुछ अहम बातें सामने रखी थीं। कांग्रेस नेता का कहना है कि अब एक बार फिर जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर बात की है, जिससे कई गंभीर सवाल और चिंताएं पैदा होती हैं।

पूर्व CDS अनिल चौहान ने 25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के एक कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की परिस्थितियों को लेकर कई अहम जानकारियां साझा की थीं। उनके बयानों में पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के दौरान लिए गए रणनीतिक फैसलों, संभावित लक्ष्यों और ऑपरेशन की योजना से जुड़े पहलू शामिल रहे।

स्कर्दू एयरबेस भी था संभावित निशाने पर

जनरल अनिल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सर्गोधा पर कार्रवाई को मंजूरी दिए जाने के बाद दो अन्य लक्ष्यों की पहचान करने को कहा गया था। इनमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में स्थित स्कर्दू एयरबेस भी शामिल था। हालांकि, खराब मौसम की वजह से स्कर्दू पर कार्रवाई की योजना बदलनी पड़ी और इसके स्थान पर भोलारी को निशाना बनाया गया।

चौहान के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से बातचीत की इच्छा जताए जाने के समय भी भारतीय सैन्य नेतृत्व के सामने कार्रवाई को लेकर फैसले लेने की स्थिति थी। उन्होंने बताया कि उस दौरान सर्गोधा पर हमले को लेकर एयर चीफ ने उनसे राय मांगी थी और उन्होंने कार्रवाई को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी थी।

किराना हिल्स को लेकर भी सामने आया बड़ा बयान

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के किराना हिल्स क्षेत्र को लेकर भी लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। यह इलाका सर्गोधा के आसपास स्थित है और पाकिस्तान के परमाणु प्रतिष्ठानों से जोड़ा जाता रहा है। जनरल चौहान ने कहा कि भारत ने किराना हिल्स को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया था।

उनके अनुसार, सर्गोधा और उसके आसपास रडार की तलाश के लिए कई लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे गए थे। इनमें से कोई एक हथियार अपने निर्धारित लक्ष्य की पहचान नहीं कर पाया और उसके बाद उसके किराना हिल्स क्षेत्र में गिरने की संभावना जताई गई। उन्होंने इसे जानबूझकर किया गया हमला नहीं बताया। इससे पहले तत्कालीन डायरेक्टर जनरल ऑफ एयर ऑपरेशंस एयर मार्शल ए.के. भारती ने भी स्पष्ट किया था कि भारत ने किराना हिल्स या वहां मौजूद किसी परमाणु प्रतिष्ठान को लक्ष्य बनाकर हमला नहीं किया था। जनरल चौहान के हालिया बयान ने इस पुराने विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है।

अब कारगिल समीक्षा समिति का जिक्र क्यों?

जयराम रमेश ने अपने बयान में कारगिल समीक्षा समिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि कारगिल युद्ध समाप्त होने के कुछ ही दिनों बाद, 29 जुलाई 1999 को तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने के. सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता में कारगिल समीक्षा समिति का गठन किया था। इस समिति का उद्देश्य कारगिल संघर्ष के दौरान सामने आई परिस्थितियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की समीक्षा करना था।

कांग्रेस नेता ने इसी संदर्भ में ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े सैन्य बयानों और सार्वजनिक रूप से सामने आ रही जानकारियों पर चिंता जताई है। उनका तर्क है कि सैन्य अभियानों से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं को सार्वजनिक किए जाने के राजनीतिक और रणनीतिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से जारी है राजनीतिक बहस

भारत ने 7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाकर कार्रवाई की थी।

ऑपरेशन के दौरान भारतीय सैन्य कार्रवाई और उसके बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच लगातार राजनीतिक बयानबाजी होती रही है। अब पूर्व CDS अनिल चौहान की ओर से ऑपरेशन के रणनीतिक पहलुओं को लेकर सामने आई नई जानकारियों ने इस बहस को एक बार फिर तेज कर दिया है।

जयराम रमेश के ताजा हमले से साफ है कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं देख रही, बल्कि ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं के सार्वजनिक होने और सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठा रही है। वहीं, जनरल चौहान के हालिया बयानों में ऑपरेशन के दौरान लिए गए फैसलों और सैन्य रणनीति के कई पहलुओं पर नई जानकारी सामने आई है।

Check Also

Xi Jinping India Visit: भारत आने को लेकर शी जिनपिंग ने क्यों साधी चुप्पी? BRICS से पहले चीन की रणनीति पर उठे बड़े सवाल

नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर में भारत आने की संभावना को लेकर …