
कलयुग में बढ़ता अधर्म और धर्म का संघर्ष
मान्यता है कि वर्तमान समय कलयुग का है, जहां धीरे-धीरे अधर्म ने धर्म पर प्रभाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। धार्मिक मान्यताओं और पुराणों के अनुसार जैसे-जैसे कलयुग आगे बढ़ रहा है, समाज में क्रोध, द्वेष, हिंसा, लूट, छल और कपट जैसी प्रवृत्तियां बढ़ती जा रही हैं। कहा जाता है कि जब धर्म और अधर्म का संघर्ष अपने चरम पर पहुंचेगा, तब भगवान विष्णु के दसवें अवतार के रूप में कल्कि अवतार का प्राकट्य होगा, जो अधर्म के विनाश का कारण बनेगा।
महाभारत काल से कलयुग की शुरुआत का उल्लेख
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के पृथ्वी से प्रस्थान के बाद कलयुग की शुरुआत मानी जाती है। इसके बाद समाज में धीरे-धीरे बदलाव आने लगे, व्यापार का विस्तार हुआ, नगरों का विकास बढ़ा और लोगों के जीवन जीने के तरीके में परिवर्तन आने लगा। शुरुआत में कलयुग का प्रभाव सामान्य था, लेकिन समय के साथ इसके प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखने लगे।
राजा नल और कलयुग की कथा से सीख
महाभारत के वन पर्व में वर्णित राजा नल और दमयंती की कथा को कलयुग के प्रभाव का उदाहरण माना जाता है। विदर्भ की राजकुमारी दमयंती ने स्वयंवर में राजा नल को अपना पति चुना था, जिससे कई देवता भी नाराज हो गए थे। जब देवताओं की मुलाकात कलयुग से हुई तो वह क्रोधित हो गया कि एक मानव को देवताओं से अधिक महत्व मिला।
इसके बाद कलयुग ने राजा नल से प्रतिशोध लेने का प्रयास किया, लेकिन वह उनके शरीर में प्रवेश नहीं कर पाया क्योंकि राजा नल धर्मात्मा और सदाचारी थे। लगभग 12 वर्षों तक प्रतीक्षा करने के बाद एक दिन जब राजा नल संध्या पूजा में असावधानीवश अपवित्र अवस्था में बैठे, तब कलयुग उनके शरीर में प्रवेश कर गया। इसके बाद राजा नल के जीवन में दुर्भाग्य और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई।
कलयुग के प्रभाव से बदली राजा नल की नियति
कलयुग के प्रभाव में राजा नल की बुद्धि भ्रमित हो गई और उनके जीवन में संकट बढ़ने लगे। उनके भाई पुष्कर ने इस स्थिति का लाभ उठाया और उन्हें जुए के खेल के लिए प्रेरित किया। परिणामस्वरूप राजा नल ने अपना राज्य और समृद्धि सब कुछ खो दिया और उन्हें रानी दमयंती के साथ वन में भटकना पड़ा।
कल्कि अवतार की आयु और प्राकट्य से जुड़ी मान्यता
विष्णु पुराण, भविष्य पुराण और श्रीमद्भागवत जैसे ग्रंथों में कल्कि अवतार का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि जब कलयुग अपने चरम पर पहुंचेगा और अधर्म अत्यधिक बढ़ जाएगा, तब भगवान विष्णु कल्कि रूप में अवतार लेंगे। भविष्य मालिका की मान्यताओं के अनुसार जब कलयुग को लगभग 5000 वर्ष बीत जाएंगे, तब अधर्म अपने शिखर पर होगा और उसके अंत के करीब कल्कि अवतार का प्राकट्य होगा। कहा जाता है कि कल्कि अवतार की लीलाएं लगभग 23 वर्षों तक चलेंगी और इसी दौरान कलयुग का अंत होगा।
निष्कर्ष
धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं के अनुसार कलयुग का प्रभाव बढ़ता हुआ समाज में स्पष्ट दिखाई देता है और इसी के बीच कल्कि अवतार को अधर्म के अंत और धर्म की पुनर्स्थापना का प्रतीक माना गया है।
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