धर्म डेस्क : हिंदू धर्म में पूजा-पाठ के दौरान धूप, अगरबत्ती और हवन का विशेष महत्व है। हम पूरी श्रद्धा के साथ ईश्वर की आराधना तो करते हैं, लेकिन अक्सर पूजा के अंत में बची हुई राख (भस्म) को लेकर गंभीर गलतियां कर बैठते हैं। ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा की राख को साधारण कचरा समझना आपकी सुख-समृद्धि के लिए भारी पड़ सकता है। अनजाने में इसे सिंक या कूड़ेदान में फेंकना न केवल पितृ दोष बल्कि वास्तु दोष का भी कारण बन सकता है।
राख नहीं, यह है ‘दिव्य भस्म’ का अंश
शास्त्रों में धूप और हवन की राख को सामान्य अवशेष नहीं, बल्कि ‘भस्म’ कहा गया है। इसमें मंत्रों की शक्ति और अग्नि देव की पवित्रता समाहित होती है। जब आप इस राख को पैरों के नीचे आने देते हैं या गंदी जगह पर फेंकते हैं, तो यह सीधे तौर पर देवताओं का अपमान माना जाता है। धार्मिक गुरुओं के अनुसार, ऐसी लापरवाही से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है।
कहां विसर्जित करें पूजा की राख? जानें सही तरीका
अगर आप भी उलझन में हैं कि इस राख का क्या किया जाए, तो ज्योतिष शास्त्र में इसके कई उत्तम विकल्प बताए गए हैं:
-
तुलसी या पवित्र पौधों में अर्पण: धूप की राख को विसर्जित करने का सबसे सरल और शुभ तरीका इसे घर के गमलों या तुलसी के पौधे की जड़ में डालना है। यह न केवल खाद का काम करती है, बल्कि इसकी पवित्रता भी बनी रहती है।
-
बहते जल में प्रवाह: यदि संभव हो, तो राख को किसी पवित्र नदी या जलाशय में प्रवाहित करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।
-
पीपल के पेड़ की जड़: घर के पास यदि पीपल या बरगद का पेड़ हो, तो वहां की साफ मिट्टी में इसे दबाया जा सकता है।
राहु-केतु के दोष से बचने के लिए बरतें ये सावधानी
भूलकर भी पूजा की राख को नाली, सिंक या डस्टबिन में न डालें। ऐसा करने से राहु और केतु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है, जो जीवन में अचानक आने वाली बाधाओं का कारण बनता है। साथ ही, ध्यान रखें कि राख को कभी भी कांटेदार पौधों (जैसे कैक्टस) में न डालें, क्योंकि यह उन्नति में बाधक माना जाता है।
राख के अचूक फायदे और सदुपयोग
पूजा की राख केवल विसर्जन के लिए नहीं, बल्कि इसके कई आध्यात्मिक लाभ भी हैं। हवन की शुद्ध राख को तिलक के रूप में माथे पर लगाने से मानसिक शांति मिलती है और आज्ञा चक्र जाग्रत होता है। यदि आप इसे तुरंत विसर्जित नहीं कर सकते, तो एक पीतल या मिट्टी के छोटे पात्र में इसे संचित कर रखें और महीने में एक बार जल प्रवाहित कर दें।
Hindustan Awaaz – Hindustan Newspaper, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया
