
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कच्चे तेल की सप्लाई सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने कई देशों से लाखों बैरल क्रूड खरीदकर आयात स्रोतों के विविधीकरण की रणनीति को गति दी है।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच भारत ने अपनी कच्चे तेल की खरीद नीति में अहम बदलाव के संकेत दिए हैं। देश की सबसे बड़ी सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) अब केवल पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों से तेल खरीदने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना और किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम करना है।
50 लाख बैरल क्रूड की बड़ी खरीद
व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने इस सप्ताह जारी एक टेंडर के माध्यम से लगभग 50 लाख बैरल कच्चे तेल की खरीद की है। यह खरीद पश्चिम अफ्रीका और मध्य पूर्व के विभिन्न स्रोतों से की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक आपूर्ति जोखिमों को कम करने की दिशा में भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।
अंगोला से खरीदा किस्सांजे और नेंबा क्रूड
सूत्रों के मुताबिक, ओडिशा स्थित पारादीप रिफाइनरी के लिए आईओसी ने अंगोला से किस्सांजे (Kissanje) और नेंबा (Nemba) ग्रेड का कच्चा तेल खरीदा है। पश्चिम अफ्रीका के ये क्रूड ग्रेड अपनी गुणवत्ता और रिफाइनिंग क्षमता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
नाइजीरिया और अबू धाबी से भी बढ़ाई खरीद
कंपनी ने गुजरात के वडीनार बंदरगाह पर डिलीवरी के लिए अमेरिकी ऊर्जा दिग्गज ExxonMobil से नाइजीरिया का ऊसान (Usan) क्रूड खरीदा है। इसके अलावा वैश्विक कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनी Mercuria के जरिए अबू धाबी का मुरबन (Murban) क्रूड भी अपनी खरीद सूची में शामिल किया गया है।
चेन्नई के लिए भी मुरबन क्रूड का सौदा
सूत्रों ने बताया कि चेन्नई क्षेत्र में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इंडियन ऑयल ने TotalEnergies की ट्रेडिंग इकाई Totsa के माध्यम से भी मुरबन क्रूड की खरीद की है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी विभिन्न रिफाइनरियों की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग ग्रेड के तेल की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम पर हुई खरीद
जानकारी के अनुसार, पश्चिम अफ्रीका से खरीदे गए कार्गो डेटेड ब्रेंट के मुकाबले करीब 4 डॉलर प्रति बैरल के प्रीमियम पर बिके। वहीं मुरबन क्रूड की कीमत डेटेड ब्रेंट के आसपास या उससे मामूली प्रीमियम पर रही। यह दर्शाता है कि मौजूदा बाजार परिस्थितियों में गुणवत्ता और आपूर्ति सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
ऊर्जा सुरक्षा पर भारत का बढ़ता फोकस
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और वैश्विक सप्लाई चेन पर मंडरा रहे जोखिमों के बीच भारत अपने आयात स्रोतों का दायरा बढ़ा रहा है। इससे न केवल आपूर्ति बाधित होने का खतरा कम होगा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और मूल्य स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी। हालांकि संबंधित कंपनियां आमतौर पर अपनी व्यावसायिक खरीद-बिक्री पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचती हैं।
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