
लखनऊ:उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी हुई फाइनल वोटर लिस्ट ने सियासी हलकों में नई हलचल पैदा कर दी है। जहां पहले विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर हमलावर था, वहीं अब सामने आए आंकड़े सत्तारूढ़ भाजपा के लिए चुनौती बनते दिख रहे हैं। खास बात यह है कि जिन विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है, वहीं सबसे अधिक वोटों में कमी दर्ज की गई है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) की सीटों पर गिरावट अपेक्षाकृत कम रही है।
अयोध्या और लखनऊ कैंट में बड़ा झटका
भाजपा की सियासी पहचान मानी जाने वाली अयोध्या विधानसभा सीट पर वोटों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यहां 20 हजार से कम अंतर से जीत हासिल की थी, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में यह अंतर घटकर महज 4600 रह गया। अब नई वोटर लिस्ट में यहां करीब 20% यानी 80 हजार से ज्यादा वोट कम हो गए हैं।
इसी तरह लखनऊ कैंट सीट, जहां से डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 39 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी, वहां भी 1.24 लाख वोट घटे हैं, जो कुल वोटरों का लगभग 33% है।
16 सीटों पर एक लाख से ज्यादा वोट गायब
प्रदेश में कुल 16 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां एक लाख से अधिक वोट कम हुए हैं। इनमें से 15 सीटें भाजपा के खाते में हैं, जबकि केवल लखनऊ पश्चिम सीट सपा के हिस्से में है, जहां 1.07 लाख वोट कम हुए हैं।
सीटवार आंकड़े दे रहे बड़े संकेत
यदि प्रतिशत के आधार पर देखें तो जिन सीटों पर 18% से 34% तक वोट घटे हैं, उनमें अधिकांश भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सीटें शामिल हैं। इसके उलट सपा की ज्यादातर सीटों पर वोट कटौती 15% से कम रही है। केवल कुछ ही सीटें ऐसी हैं जहां यह आंकड़ा 20% से ऊपर गया है।प्रदेश की 159 सीटों पर 30 से 50 हजार के बीच वोट घटे हैं, जिनमें करीब एक तिहाई सीटें भाजपा गठबंधन की हैं।
भाजपा की सीटों पर ज्यादा असर, सपा अपेक्षाकृत सुरक्षित
50 से 80 हजार वोटों की कटौती वाले क्षेत्रों में भी भाजपा को ज्यादा नुकसान हुआ है। इस श्रेणी में जहां सपा की 18 सीटें आती हैं, वहीं भाजपा और उसके सहयोगियों की 55 से ज्यादा सीटें शामिल हैं।वहीं 80 हजार से 1 लाख के बीच वोट घटने वाली 21 सीटों में से 19 सीटें 2022 में भाजपा गठबंधन ने जीती थीं, जिससे साफ है कि असर का दायरा भाजपा पर ज्यादा है।
शहरी क्षेत्रों में ज्यादा गिरावट, गांवों में स्थिरता
वोटों में सबसे ज्यादा गिरावट शहरी क्षेत्रों में दर्ज की गई है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर से सटे महानगरों में इसका प्रभाव अधिक दिखा है। इसके बाद अर्धशहरी और कस्बाई क्षेत्रों में भी वोटों में कमी देखने को मिली है, जहां बड़ी संख्या में भाजपा का प्रभाव रहा है।इसके विपरीत ग्रामीण इलाकों में वोटों की कटौती अपेक्षाकृत कम रही है, जिससे वहां सियासी समीकरण ज्यादा स्थिर नजर आ रहे हैं।
नतीजों पर नजर, किसे होगा फायदा?
फाइनल वोटर लिस्ट के ये आंकड़े आने वाले चुनावों के लिए नई रणनीतियों का संकेत दे रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बदलाव का फायदा किसे मिलता है और किसके लिए यह नुकसानदेह साबित होता है।
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