ड्रग किंगपिन पर यूपी पुलिस का ‘हथौड़ा’: 80 करोड़ की संपत्ति कुर्क, नशे के सौदागर की 34 संपत्तियां सीज; प्रदेश की सबसे बड़ी कार्रवाई

मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में नशे के काले कारोबार के खिलाफ योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। मुजफ्फरनगर पुलिस ने ‘ऑपरेशन सवेरा’ के तहत प्रदेश की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए ड्रग माफिया बाबू उर्फ रियाज उर्फ अशफाक की कमर तोड़ दी है। एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) के तहत पुलिस ने आरोपी की 80 करोड़ रुपये से ज्यादा की चल-अचल संपत्ति को जब्त कर लिया है। इस बड़ी चोट से नशा तस्करों के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है।

‘ऑपरेशन सवेरा’ के तहत बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक

मुजफ्फरनगर के एसएसपी संजय कुमार वर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने नशे के सौदागर रियाज के साम्राज्य को मिट्टी में मिला दिया है। जांच में सामने आया कि आरोपी साल 2012 से स्मैक और अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी में सक्रिय था। अवैध धंधे से काली कमाई कर उसने बरेली और शाहजहांपुर जैसे जिलों में अकूत संपत्ति खड़ी कर ली थी। बुढ़ाना पुलिस द्वारा भारी मात्रा में स्मैक बरामदगी के बाद शुरू हुई जांच ने इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश कर दिया।

बरेली से शाहजहांपुर तक फैला था जाल, 34 प्रॉपर्टी सीज

तस्कर रियाज ने अपनी बेहिसाब संपत्ति को छिपाने के लिए अपने रिश्तेदारों के नाम पर भी निवेश किया था। मुजफ्फरनगर पुलिस ने दिल्ली स्थित सक्षम प्राधिकरण (Competent Authority) से अनुमति मिलने के बाद एनडीपीएस एक्ट की धारा 68F के तहत कार्रवाई को अंजाम दिया। सीज की गई 34 संपत्तियों में आलीशान कोठियां, कई ईंट भट्ठे, बेशकीमती कृषि भूमि और व्यावसायिक प्लॉट शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, इन संपत्तियों की वर्तमान बाजार कीमत 80 करोड़ रुपये से भी अधिक है।

एसएसपी का अल्टीमेटम: ‘बख्शे नहीं जाएंगे नशे के सौदागर’

एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने इस कार्रवाई को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह यूपी में एनडीपीएस एक्ट के तहत अब तक की सबसे बड़ी जब्ती है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि मुजफ्फरनगर पुलिस नशे के कारोबार में शामिल हर छोटे-बड़े अपराधी को चिन्हित कर रही है। आने वाले दिनों में अन्य बड़े ड्रग माफियाओं की संपत्तियों पर भी कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।

रिश्तेदारों के नाम पर था बेनामी निवेश

पुलिस की पड़ताल में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी ने अपनी काली कमाई को सफेद दिखाने के लिए ईंट भट्ठों और जमीन की खरीद-फरोख्त का सहारा लिया था। बरेली और शाहजहांपुर में खरीदी गई अधिकांश संपत्तियां बेनामी थीं या दूर के रिश्तेदारों के नाम पर दर्ज थीं। हालांकि, गहन वित्तीय जांच के बाद पुलिस ने इन सभी का लिंक तस्कर रियाज से जोड़ते हुए इन्हें सीज कर दिया है।

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