UP News: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में सड़कों पर उतरी क्रांति सेना, कलेक्ट्रेट पहुंचकर उच्चस्तरीय जांच की मांग

Uttar Pradesh के Muzaffarnagar में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में क्रांति सेना ने जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मामले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई। प्रदर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह आंदोलनात्मक रहा और प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया गया।

कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

क्रांति सेना के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एकत्र होकर जुलूस की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। संगठन के नेताओं का कहना है कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है, जिसकी पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सार्वजनिक की जाए ताकि संत समाज की गरिमा बनी रहे।

संत समाज के सम्मान की बात, कार्रवाई की उठी मांग

प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि देश की सनातन परंपरा में शंकराचार्यों का विशेष स्थान है और उनके सम्मान से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

कानून व्यवस्था पर भी उठे सवाल

धरना-प्रदर्शन के बीच कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए गए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रशासन को संवेदनशील मामलों में संतुलित और तथ्यात्मक रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या उच्च अधिकारी की निगरानी में कराई जाए ताकि किसी भी प्रकार का पक्षपात न हो।

प्रशासन ने दिया आश्वासन

कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को लिखित रूप में रखा। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को आश्वस्त किया कि ज्ञापन को संबंधित स्तर तक भेजा जाएगा और नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि संगठन ने साफ किया है कि यदि मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन जारी रहेगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। संत समाज से जुड़े इस मुद्दे ने स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

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