UP News: तबादलों में 10% कमीशन का खेल! योगी सरकार का बड़ा एक्शन, व्यावसायिक शिक्षा विभाग के दो अधिकारी निलंबित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी सख्त अभियान के बीच योगी आदित्यनाथ सरकार ने व्यावसायिक शिक्षा विभाग में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग में कथित कमीशनखोरी, धन उगाही और पद के दुरुपयोग के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए दो अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद विभागीय गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है और कर्मचारियों के बीच मामले की चर्चा तेज हो गई है।

तबादलों के नाम पर वसूली के आरोप

जानकारी के अनुसार, प्रशिक्षण निदेशालय में तैनात सहायक निदेशक धीरेन्द्र कुमार झा और प्रधान सहायक इमरान अहमद पर लंबे समय से विभिन्न शिकायतें मिल रही थीं। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबन के आदेश जारी किए।

सूत्रों के मुताबिक, स्थानांतरण सत्र के दौरान तबादलों को प्रभावित करने और सुविधाजनक पोस्टिंग दिलाने के बदले कर्मचारियों से कथित रूप से मोटी रकम वसूले जाने की शिकायतें सामने आई थीं। आरोप है कि कई मामलों में तबादले कराने के एवज में करीब 10 प्रतिशत तक कमीशन लिया जाता था।

शिकायतों के जरिए बनाया जाता था दबाव

विभागीय जांच में यह भी आरोप सामने आया कि कुछ मामलों में अलग-अलग नामों से शिकायतें दर्ज कराई जाती थीं। बाद में उन्हीं शिकायतों को समाप्त कराने या कार्रवाई रुकवाने के नाम पर संबंधित कर्मचारियों पर दबाव बनाया जाता था। आरोप है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल कथित धन उगाही के लिए किया जा रहा था।

धार्मिक भेदभाव और उत्पीड़न के भी आरोप

प्रधान सहायक इमरान अहमद के खिलाफ भ्रष्टाचार के अलावा कर्मचारियों के उत्पीड़न और धार्मिक आधार पर भेदभाव जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। विभागीय स्तर पर मिली शिकायतों में कहा गया है कि कुछ मामलों में संगठित तरीके से प्रभाव का इस्तेमाल कर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

प्रमुख सचिव ने जारी किए आदेश

व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम द्वारा निलंबन संबंधी आदेश जारी किए गए, जबकि निदेशक प्रशिक्षण अभिषेक सिंह ने इसे तत्काल प्रभाव से लागू कराया। आदेश के तहत निलंबन अवधि के दौरान संबंधित अधिकारियों की नई संबद्धता भी तय कर दी गई है।

जांच जारी, और कार्रवाई के संकेत

सरकारी सूत्रों का कहना है कि मामला केवल निलंबन तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच आगे बढ़ाई जा रही है और यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो और भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और प्रशासनिक अनियमितताओं को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का संदेश

योगी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हाल के वर्षों में सरकार लगातार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में सख्त रुख अपनाती रही है। ऐसे में व्यावसायिक शिक्षा विभाग में हुई यह कार्रवाई अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए स्पष्ट संदेश मानी जा रही है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई तय है।

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