
3 अगस्त से शुरू होने जा रहे उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन के सुचारु संचालन पर जोर दिया, जबकि विपक्ष ने अपने मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार, 3 अगस्त 2026 से शुरू होने जा रहा है। सत्र से पहले रविवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य सदन की कार्यवाही को सुचारु, गरिमापूर्ण और जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रखना रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी दलों से लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए स्वस्थ और सकारात्मक चर्चा में भाग लेने की अपील की।
सदन में जनहित के मुद्दों पर चर्चा की अपील
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंच है, जहां जनता से जुड़े विषयों पर गंभीर और रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी सदस्य सदन की गरिमा बनाए रखते हुए जनहित से जुड़े मुद्दों पर सार्थक बहस करेंगे और प्रदेश के विकास से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देंगे।
स्पीकर सतीश महाना बोले- लोकतंत्र की मजबूती का माध्यम है बहस
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सर्वदलीय बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि चर्चा और बहस लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि सदन में सहमति और असहमति दोनों लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और सभी जनप्रतिनिधियों का सहयोग विधानसभा की कार्यवाही को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
महाना ने यह भी बताया कि इस बार का मानसून सत्र कई मायनों में विशेष रहने वाला है। उन्होंने कहा कि पहली बार विधानसभा में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा गीत गाया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है।
सरकार बताएगी उपलब्धियां, विपक्ष उठाएगा अपने मुद्दे
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने कार्यकाल के करीब साढ़े चार वर्षों के दौरान किए गए विकास कार्यों और उपलब्धियों को सदन में रखेगी। वहीं विपक्ष भी जनता से जुड़े अपने मुद्दों को मजबूती से उठाएगा। ऐसे में मानसून सत्र के दौरान विभिन्न विषयों पर व्यापक चर्चा और तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल सकती है।
मानसून सत्र पर टिकी राजनीतिक नजरें
उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से यह मानसून सत्र अहम माना जा रहा है। सत्ता पक्ष जहां अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरने वाला है। ऐसे में आगामी सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना जताई जा रही है।
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