
नई दिल्ली। परिसीमन (Delimitation) बिल को लेकर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक बयान राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस का विषय बन गया है। तमिलनाडु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि जो भी परिसीमन बिल का समर्थन करेगा, वह ‘21वीं सदी का एट्टप्पन’ कहलाएगा। हालांकि उन्होंने किसी राजनीतिक दल का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान को तमिलनाडु की राजनीति और विशेष रूप से डीएमके (DMK) के लिए एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
परिसीमन को लेकर भाजपा पर राहुल गांधी का निशाना
तमिलनाडु के मामल्लापुरम में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के जरिए तमिलनाडु की राजनीतिक ताकत को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
राहुल गांधी ने कहा कि यह केवल लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण का विषय नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु के अधिकारों, भविष्य और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। उनके अनुसार, इस प्रस्ताव का समर्थन करना राज्य के हितों के खिलाफ माना जाएगा।
‘21वीं सदी का एट्टप्पन’ बयान से तेज हुई राजनीतिक चर्चा
अपने बयान में राहुल गांधी ने कहा कि जो भी परिसीमन बिल का समर्थन करेगा, वह तमिलनाडु के लोगों और उनके भविष्य के साथ विश्वासघात करेगा। ऐसे लोग 21वीं सदी के एट्टप्पन होंगे।
तमिल इतिहास में एट्टप्पन को विश्वासघात के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी वजह से राहुल गांधी के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विश्लेषकों का मानना है कि यह टिप्पणी केवल भाजपा पर हमला नहीं, बल्कि सहयोगी दलों को भी एक राजनीतिक संकेत हो सकती है।
क्या DMK के लिए था राहुल गांधी का परोक्ष संदेश?
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में किसी दल का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में उनके बयान को डीएमके (DMK) के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हाल के दिनों में परिसीमन के मुद्दे पर डीएमके के रुख को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। ऐसे में राहुल गांधी की टिप्पणी को कांग्रेस की ओर से एक अप्रत्यक्ष राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
तमिलनाडु की राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि परिसीमन का मुद्दा राज्य की राजनीतिक हिस्सेदारी और भविष्य की चुनावी रणनीति से सीधे जुड़ा हुआ है।
संसद सत्र में फिर आ सकता है परिसीमन बिल
राजनीतिक चर्चाओं के बीच यह संभावना भी जताई जा रही है कि संसद के मौजूदा सत्र में महिला आरक्षण विधेयक के साथ परिसीमन बिल भी दोबारा चर्चा के लिए लाया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना है।राहुल गांधी का बयान ऐसे समय आया है जब परिसीमन को लेकर दक्षिण भारत के कई राज्यों में पहले से ही राजनीतिक संवेदनशीलता बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर विभिन्न दलों की रणनीति और रुख पर सभी की नजर रहेगी।
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