UP Assembly Budget Session: ‘नकली पनीर बंद हुआ तो दूध 150 रुपये किलो’, सपा विधायक समरपाल सिंह का दावा, सदन में गूंजा किस्सा और उठी बड़ी मांग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को उस समय हलचल मच गई जब नौगावां सादात सीट से समाजवादी पार्टी के विधायक समरपाल सिंह ने फसलों में कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल और बाजार में कथित नकली पनीर की बिक्री का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उनकी ओर से सुनाया गया एक किस्सा सदन में चर्चा का केंद्र बन गया और स्पीकर सहित सत्ता-विपक्ष के सदस्य ठहाके लगाने को मजबूर हो गए, लेकिन इसके पीछे उन्होंने स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े किए।

बजट सत्र में उठा स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा का मुद्दा

प्रदेश में 9 फरवरी से शुरू हुआ विधानसभा का बजट सत्र 20 फरवरी तक प्रस्तावित है। 11 फरवरी को सरकार की ओर से बजट पेश किया जा चुका है। इसी सत्र के दौरान कीटनाशकों के उपयोग पर बोलते हुए समरपाल सिंह ने दावा किया कि वेस्ट यूपी में फसलों पर हो रहे अत्यधिक रासायनिक छिड़काव से हालात पंजाब जैसे बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

‘होटल में पनीर मंगाया तो बीजेपी विधायक ने मना कर दिया’

विधानसभा में बोलते हुए सपा विधायक ने एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक बार वह एक होटल में भोजन कर रहे थे और उनके साथ बीजेपी के एक विधायक भी मौजूद थे। जब खाने में पनीर मंगाया गया तो बीजेपी विधायक ने उसे खाने से इनकार कर दिया। कारण पूछने पर उन्होंने कथित तौर पर कहा कि बाजार में ज्यादातर नकली पनीर बिक रहा है।

समरपाल सिंह ने सदन में बताया कि उन्होंने उस विधायक से कहा कि जब सरकार आपकी है तो नकली पनीर की बिक्री पर रोक क्यों नहीं लगाई जाती। इस पर जवाब मिला कि अगर नकली पनीर बंद हो गया तो दूध 150 रुपये किलो बिकने लगेगा। विधायक के इस बयान पर सदन में जोरदार ठहाके लगे, लेकिन समरपाल सिंह ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताया।

‘सरकार कार्रवाई करे, लोगों की सेहत दांव पर’

सपा विधायक ने मांग की कि खाद्य पदार्थों में मिलावट और नकली डेयरी उत्पादों की बिक्री पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर बाजार में नकली पनीर खुलेआम बिक रहा है तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का ही नहीं, बल्कि आम जनता की सेहत से जुड़ा मुद्दा है।

उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को रसायनों के विकल्प के रूप में सुरक्षित और टिकाऊ खेती के तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि मिट्टी और खाद्य श्रृंखला दोनों सुरक्षित रह सकें।

सदन में हल्की नोंकझोंक, लेकिन संदेश गंभीर

बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई बार तीखी बहस देखने को मिली है। हालांकि गुरुवार को सुनाया गया यह किस्सा भले ही हास्य का कारण बना, लेकिन इसके जरिए खाद्य सुरक्षा, दूध की कीमत, नकली पनीर और कीटनाशकों के दुष्प्रभाव जैसे मुद्दे एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए हैं।

गौरतलब है कि समरपाल सिंह अमरोहा जिले की नौगावां सादात विधानसभा सीट से विधायक हैं और इससे पहले भी वे क्षेत्रीय मुद्दों को सदन में मुखरता से उठाते रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले पर क्या कदम उठाती है और मिलावटी खाद्य पदार्थों पर कार्रवाई को लेकर क्या ठोस निर्णय लिए जाते हैं।

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