नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत से ठीक पहले एक नया विवाद सामने आ गया है। ईरान के खेल मंत्री अहमद दुन्यामाली ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि विश्व कप मुकाबलों के दौरान स्टेडियम में ऐसे झंडे प्रदर्शित किए गए जिन्हें ईरान आधिकारिक मान्यता नहीं देता या फिर राष्ट्रीय टीम के खिलाफ नारेबाजी की गई, तो ईरानी टीम मैच को बीच में रोकने का फैसला कर सकती है। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले आए इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत में हलचल बढ़ा दी है।
फीफा को पहले ही दे दी गई जानकारी
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खेल मंत्री अहमद दुन्यामाली ने कहा कि इस संबंध में फीफा को पहले ही अवगत करा दिया गया है। उन्होंने बताया कि जहां-जहां ईरान के मुकाबले आयोजित होंगे, वहां किसी भी प्रकार की राजनीतिक या विरोधी गतिविधि को लेकर उनकी टीम सतर्क रहेगी। यदि स्टेडियम में ऐसे झंडे दिखाई देते हैं जो आधिकारिक रूप से स्वीकार्य नहीं हैं या फिर टीम और देश के खिलाफ नारे लगाए जाते हैं, तो टीम प्रबंधन मैच रुकवाने की कार्रवाई कर सकता है।
ग्रुप-जी में है ईरान, इन टीमों से होगा मुकाबला
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ईरान को ग्रुप-जी में रखा गया है। टीम अपना पहला मुकाबला 15 जून को लॉस एंजिल्स में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलेगी। इसके बाद 21 जून को बेल्जियम से मुकाबला होगा। वहीं ग्रुप चरण का अंतिम मैच 26 जून को सिएटल में मिस्र के खिलाफ खेला जाएगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अंतिम मुकाबले के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होने का भरोसा दिया गया है।
मिस्र के खिलाफ मैच को लेकर मिला आश्वासन
दुन्यामाली ने दावा किया कि ईरानी प्रतिनिधियों को संबंधित अधिकारियों की ओर से आश्वासन दिया गया है कि मिस्र के खिलाफ होने वाले मुकाबले में स्टेडियम के भीतर किसी भी तरह की अप्रिय घटना नहीं होने दी जाएगी। हालांकि अन्य मैचों को लेकर ईरान ने अपनी चिंता खुलकर जाहिर की है।
ईरान की भागीदारी पर पहले से उठ रहे हैं सवाल
ईरान के इस बयान का समय भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल, पिछले कुछ महीनों से विश्व कप में ईरान की भागीदारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस चल रही है। अप्रैल महीने में कनाडा के वैंकूवर में आयोजित फीफा कांग्रेस के बाहर कई प्रदर्शनकारियों ने ईरान को टूर्नामेंट से बाहर करने की मांग की थी।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि राष्ट्रीय फुटबॉल टीम देश की जनता का नहीं बल्कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रभाव का प्रतिनिधित्व करती है। इसी मुद्दे को लेकर कई मानवाधिकार संगठनों ने भी सवाल उठाए थे।
वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले बढ़ा तनाव
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के उद्घाटन से पहले आया ईरान का यह कड़ा रुख टूर्नामेंट आयोजकों के लिए नई चुनौती बन सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि विश्व कप के दौरान स्टेडियमों में सुरक्षा और राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों को लेकर फीफा किस तरह की रणनीति अपनाता है।
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