
भोपाल में मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ कहा कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।
मीडिया ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर भी अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े आरोपी, गवाह या अन्य पक्ष मीडिया में बयानबाजी से बचें। कोर्ट ने यह भी कहा कि न्यायपालिका को आरोपियों को बचाने वाला बताने वाली कथाओं से पीड़ा हो रही है।
बताया जा रहा है कि कोर्ट ने मीडिया संस्थानों से संयमित रिपोर्टिंग की अपील की है, ताकि जांच प्रभावित न हो और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित की जा सके।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल निवासी अधिवक्ता समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के कुछ महीनों बाद 12 मई 2026 को उनका शव भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। इसके बाद परिवार ने दहेज उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए।
मामले में पति समर्थ सिंह और उनके परिवार के खिलाफ FIR दर्ज की गई। बढ़ते जनदबाव और विरोध प्रदर्शन के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने भी CBI जांच की सिफारिश की थी।
दूसरे पोस्टमार्टम ने बढ़ाई चर्चा
ट्विशा शर्मा की मौत के बाद परिवार ने पहले पोस्टमार्टम पर सवाल उठाए थे। इसके बाद AIIMS दिल्ली के विशेषज्ञों की टीम द्वारा दूसरा पोस्टमार्टम कराया गया। इस घटनाक्रम ने मामले को और संवेदनशील बना दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई के दौरान संस्थागत पक्षपात और जांच प्रक्रिया में संभावित खामियों को गंभीरता से लिया। इसी कारण अदालत ने स्वतः संज्ञान लेकर मामले की निगरानी शुरू की।
देशभर में उठ रही निष्पक्ष जांच की मांग
ट्विशा शर्मा केस ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक व्यापक चर्चा छेड़ दी है। परिवार लगातार निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय की मांग कर रहा है। अब CBI जांच के आदेश के बाद मामले में कई नए खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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